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प्रदेश के 27 जिलों में जांच ,FIR सिर्फ जबलपुर में मध्य प्रदेश के 27 जिलों की 758 राइस मिलों की हुई है जांच

प्रदेश के 27 जिलों में जांच ,FIR सिर्फ जबलपुर में
मध्य प्रदेश के 27 जिलों की 758 राइस मिलों की हुई है जांच

28 मार्च को अपर मुख्य सचिव ने दिए थे जांच के आदेश
जबलपुर, यश भारत। धान अफरा तफरी मामले रोज नए मामले सामने आ रहे हैं । जिले में जिस मामले में 16 राइस मिलरो पर मामला दर्ज किया गया है और शेष पर विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। यही जांच अपर मुख्य सचिव खाद्य विभाग की तरफ से पूरे प्रदेश में करवाई गई थी जिसमें प्रदेश के 27 राइस मिलिंग करने वाले जिलों की 758 राइस मिलों की जांच की गई थी। जबलपुर इकलौता जिला है जहां पर प्रशासन के द्वारा गैर जमानती धाराओं में एफ आई आर दर्ज करवाई गई है। इसके अलावा पूरे प्रदेश में किसी भी जिले में इतनी बड़ी कार्यवाही नहीं हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि बाकी जिलों में क्या प्रशासन द्वारा सिर्फ खाना पूर्ति की गई है। जबकि जिस आधार पर जबलपुर में मामला दर्ज हुआ है वैसी अनियमिताएं पूरे प्रदेश में है।

पेनाल्टी और एफिडेविड से निपटा मामला

जानकारी के मुताबिक जबलपुर को छोड़कर बाकी प्रदेश के जिलों में जो जांच हुई थी उसमें कई जिलों में स्टॉक कम मिला था तो कई जगहों पर गाड़ी के नंबर गलत मिले थे लेकिन वहां पर जांच दल के द्वारा प्रतिवेदन दिए जाने के बाद प्रशासन के द्वारा स्टॉक कम मिलने वाली राइस मिलों में पेनल्टी लगाई गई है वहीं गलत नंबर के मामले में कुछ जिलों में राइस मिलों से एफिडेविट लेकर आगे की कार्रवाई कर दी गई है। वहीं जबलपुर में इस तरह के मामले में सीधे आजीवन कारावास की धारा में मामला दर्ज किया गया है। ऐसे में सवाल उठाना तो लाजमी है कि बाकी जिलों में इतनी रियायत क्यों दी गई जबकि जबलपुर में आजीवन कारावास की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

ऑफलाइन हुआ है मिलान

मध्य प्रदेश के बहुत से जिलों में खास तौर पर जबलपुर से सटे हुए जिलों में जो जांच की गई थी उसमें स्टॉक के साथ-साथ परिवहन की भी जांच की गई थी, लेकिन जो मिलान किया गया है वह ऑफलाइन सीट के आधार पर किया गया है, यानी कि समिति से जो कागज बनाए गए थे उन्हीं को आधार बनाया गया है जबकि जबलपुर में जांच का आधार पोर्टल पर दर्ज नंबरों को लिया गया है। इसके चलते दूसरे जिलों में कार्यवाही नहीं हुई है अब मुख्यालय को यह देखना चाहिए कि एक ही आदेश के लिए दो तरह की जांच कैसे हो सकती है या तो जबलपुर जिले में जो जांच की गई वह जरूर से ज्यादा कड़ी करवाई थी या फिर बाकी जिलों में प्रशासन के द्वारा जरूर से ज्यादा रियायत दी गई , लेकिन एक ही आदेश में दो तरह की जांच को न्याय संगत नहीं ठहराए जा सकता।

शासकीय राइस मिलिंग करने वामें प्रमुख जिले

बालाघाट 123
सतना 109
जबलपुर 48
कटनी 73
रीवा 63
सिवनी 78
नर्मदापुरम 45
मंडल 45
नर्मदा पुरम 47
पन्ना 35
नरसिंहपुर 25

 

घोटाले की नियत होती तो रजिस्टर्ड नंबर से करते हेरा फेरी

उक्त मामले में प्रशासन की कार्रवाई को लेकर राइस मिलर द्वारा सोमवार को अपना पक्ष भी रखा गया। पत्रकार वार्ता के माध्यम से उन्होंने जानकारी दी कि उनके ऊपर जो 43 करोड़ के हेरा फेरी का आरोप लगाया जा रहा है उसमें शासन को 43 रुपए का भी नुकसान नहीं हुआ है। सिर्फ ऑपरेटर के द्वारा नंबर गलत डाले गए हैं। जबकि उन्होंने जिन गाड़ियों से वास्तविकता धान उठाई है उन पर प्रशासन द्वारा ध्यान नहीं दिया गया है। पत्रकार वार्ता के दौरान संगठन से जुड़े लोगों ने बताया कि यदि उन्हें हेरा फेरी करनी होती तो फिर वे गाड़ियों के गलत नंबर क्यों डालते हुए उन गाड़ियों के नंबर डालते जो की वास्तविकता में मौजूद है ताकि जांच में कभी पकड़े ही न जाते। पत्रकार वार्ता के दौरान संगठन के अलावा महाकौशल चेंबर ऑफ कॉमर्स वह अन्य अनाज व्यापारी संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे जिन्होंने कार्रवाई पर आक्रोश जताया, और मिलर्स के साथ खड़े रहने की बात होगी।

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