
जबलपुर यश भारत । संस्कारधानी जबलपुर में अवैध शराब की बिक्री और अनियंत्रित अवैध अहातों का संचालन प्रशासन की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। शहर में खुलेआम नियम तोड़ने और ओवररेट पर शराब बेचने के बावजूद इन पर कार्रवाई न होना, कहीं न कहीं पुलिस, आबकारी विभाग और प्रशासन की साठगाँठ की ओर इशारा करता है।
वीडियो वायरल, फिर भी नहीं कार्रवाई
यह सोचने वाली बात है कि अवैध अहातों, दुकान में शराब एम आर पी से ज्यादा दामों में बेची जा रही, जिसके आए दिन वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं, जिनकी जानकारी निश्चित तौर पर आबकारी विभाग तक पहुँचती है। इसके बावजूद, आज तक इन पर कोई बड़ी कार्रवाई होते नहीं देखी गई है। यह स्थिति तब और भी चिंताजनक हो जाती है जब इन अहातों के कारण नवरात्र जैसे पावन पर्व पर श्रद्धालुओं को खुलेआम छेड़छाड़ और असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है।

अल सुबह 6 बजे से बिक्री शुरू, रात भर खिडकियो से बिक्री
शराब दुकानों के खुलने और बंद होने के लिए बाकायदा नियम निर्धारित हैं, लेकिन शहर में ये नियम महज एक दिखावा बनकर रह गए हैं। शहर की कई दुकानों में सुबह 6 बजे से ही खुलेआम शराब की बिक्री शुरू हो जाती है। वहीं, रात भर गुप्त खिड़कियों के जरिए शराब बेची जा रही है।
सवाल यह उठता है कि यदि नियमों का पालन कराना ही नहीं है, तो दिखावा क्यों? और यदि नियम हैं, तो आज तक निर्धारित समय से पहले खुलने और देर रात तक चोरी-छिपे बिक्री करने वाली किसी भी दुकान के खिलाफ कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की गई? यह स्पष्ट है कि नजराने या मोटी रकम की शह पर ही यह अवैध खेल धड़ल्ले से संचालित हो रहा है।

अवैध शराब के मामलों मै आबकारी का मौन सवालों मै
ना केवल शहर में बल्कि पूरे जिले में अवैध शराब की बिक्री का गोरखधंधा चरम पर है इतना ही नहीं शहर अकेले में ऐसे कयी ठिकाने हैं जहां कच्ची शराब भी उतारी और बेची जाती है। लेकिन जिस तरह से यह गोरखधंधा संचालित हो रहा है और आबकारी विभाग आंखें बंद कर मौन धारण किए हुए हो उससे कहीं ना कहीं सवाल भी पैदा होते हैं।शराब पकड़ने की ज्यादातर कार्यवाही पुलिस के द्वारा अंजाम दी जाती है जबकि आबकारी विभाग शराब ठेकेदार और बार संचालकों पर ही नियमों का शिकंजा कसता दिखाई देता है और इसके पीछे प्रमुख वजह है यहां से मिलने वाला नजराना। ऐसा नहीं है कि अवैध शराब की बिक्री के लिए आबकारी विभाग तो जिम्मेदार है ही साथ ही शहर के बडे शराब तस्करों और धंधे बाजों की जानकारी स्थानीय पुलिस को भी रहती है लेकिन इनमें से ज्यादातर को खाकी का संरक्षण भी मिला हुआ नजर आता है। पुलिस के द्वारा भी शराब पकड़ने की जो कार्यवाहियां सामने आती हैं उनमें से ज्यादातर मामले अवैध शराब के परिवहन से जुड़े होते हैं जबकि क्षेत्र में अवैध रूप से या पेकारों के माध्यम से जो शराब बिकती है उन पर पुलिस कभी-कभार ही हाथ डालती हैं। छुटभैया तो पकड़ में भी आ जाते हैं लेकिन इस गोरखधंधे के मगरमच्छों पर पुलिस की भी मेहरबानी नजर आती है। सिर्फ छोटे तस्करों को पकड़कर खानापूर्ति की जाती है।
यदि आबकारी विभाग कड़ाई से और ईमानदारी से कार्रवाई करें, तो अवैध शराब का यह गोरखधंधा जड़ से खत्म हो सकता है। लेकिन मोटी रकम के लालच के चलते यह गोरखधंधा बदस्तूर जारी है, जिसका खामियाजा शहर की कानून-व्यवस्था और आम नागरिकों को उठाना पड़ रहा है।

प्रतिबंधित क्षेत्र में भी धड़ल्ले से बिक रही शराब
वही मध्य प्रदेश शासन द्वारा मां नर्मदा के तटों के आसपास 5 किलोमीटर की दायरे में शराब की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रखा है लेकिन नर्मदा तटों के आस-पास जिस तरह से यह गोरख धंधा चल रहा है वह न केवल शासन की मनसा पर पलीता लगा रहा है बल्कि इससे लोगों की धार्मिक आस्था को प्रभावित हो ही रही है साथ ही नर्मदा आने वाले लोगों को अनेक बार शराबियों के कारण जिल्लत भी उठानी पड़ती है। विभिन्न समाजिक संगठनों ने कई बार जिला प्रशासन से इस पर रोक लगाने और कार्यवाही करने की मांग की है लेकिन अभी तक ना तो इन पर कार्यवाही की जा रही है और ना ही पवित्र स्थलों पर शराबखोरी को रोका जा रहा है । विगत दिनों आबकारी विभाग ने एक घर से अवैध शराब सहित अवैध अहाते का भंडाफोड़ किया था बाबजूद इसके यह गोरख धंधा फिर से फल फूल रहा है । आबकारी विभाग द्वारा छोटी-मोटी कार्यवाही कर बाहबाही तो खूब लूटी जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है, इनके बड़े आकाओं को पकड़ने आबकारी विभाग के पसीने छूट जाते हैं लिहाजा पूरे जबलपुर में इस गोरखधंधे की जड़ मजबूत होती जा रही है ।







