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यमदूत बने हाइवा डंपर, शहर की सड़कों पर किसकी शह पर दौड़ रहे भारी वाहन 

नो-एंट्री सिर्फबोर्ड परः प्रतिबंध के बावजूद बेधड़क प्रवेश, जिम्मेदार खामोश

जबलपुर, यशभारत। शहर में भारी वाहनों के लिए लागू नो-एंट्री व्यवस्था पूरी तरह सवालों के घेरे में है। सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक ट्रक, डंपर और हाइवा के प्रवेश पर प्रतिबंध होने के बावजूद ये वाहन दिनदहाड़े शहर की व्यस्त सड़कों पर फर्राटा भरते नजर आते हैं। भेड़ाघाट बायपास, धनवंतरी नगर, कटंगी बायपास, माढ़ोताल, खजरी-खिरिया, बरगी, पनागर और बरेला बायपास से होकर भारी वाहन बेखौफशहर में प्रवेश कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यह सब ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ की मौजूदगी में हो रहा है, लेकिन कार्रवाई नदारद दिखाई देती है। कटंगी बायपास से चंडालभाटा ट्रांसपोर्ट नगर तक दोपहर 2 से 5 बजे के बीच ही भारी वाहनों को प्रवेश की अनुमति है, लेकिन कई वाहन इस तय व्यवस्था को धता बताते हुए शहर के सबसे व्यस्त मार्गो से गुजरते हैं। स्कूल, बाजार और रिहायशी इलाकों से गुजरते इन भारी वाहनों से हर समय किसी बड़े हादसे का खतरा बना रहता है।
सवालों के घेरे में निगरानी व्यवस्था- शहर

पहले दिखती थी सख्ती, अब मनमानी

पूर्व में नो-एंट्री का उल्लंघन करने वाले भारी वाहनों के खिलाफलगातार अभियान चलाए जाते थे। नियम तोड़ने वालों पर चालानी कार्रवाई के साथ वाहनों को जब्त भी किया जाता था। लेकिन अब ऐसे अभियान कम दिखाई दे रहे हैं, जिससे नियम तोड़ने वालों के हौसले बुलंद हैं। में नो एंट्री के खुलेआम उल्लंघन पर प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही। आम लोगों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आखिर
प्रतिबंधित समय में भारी वाहन शहर में प्रवेश कैसे कर रहे हैं और इन्हें रोकने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?

952 भारी वाहन, लेकिन निगरानी कितनी ?

आरटीओ के आंकड़ों के अनुसार शहर में ट्रक, डंपर और हाइवा सहित 952 से अधिक भारी वाहन पंजीकृत हैं। इसके अलावा बाहरी जिलों और राज्यों से आने वाले भारी वाहनों की संख्या अलग है। शहर में चल रहे निर्माण कार्यों के कारण इनकी आवाजाही लगातार बढ़ी है, लेकिन इनके संचालन और तय मार्गों के पालन की निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जरूरी है सख्त अभियान
शहर के भीतर प्रवेश करने वाले प्रत्येक भारी वाहन की नियमित जांच, चालक की फिटनेस और नशे की जांच, परमिट व नो-एंट्री नियमों के पालन की कड़ी निगरानी समय की जरूरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नियमों का प्रभावी पालन नहीं कराया गया तो किसी बड़े हादसे के बाद कार्रवाई करना केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा

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