
घरेलू हिंसा के आरोपों पर हाईकोर्ट सख्त
– ससुराल पक्ष की अग्रिम जमानत खारिज
मुंबई, यश भारत बॉम्बे हाईकोर्ट ने घरेलू हिंसा के एक गंभीर मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए सत्तारूढ़ दल से कथित रूप से जुड़े ससुर और सास की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। पुणे पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में दोनों पर अपनी बहू के साथ क्रूरता करने, मारपीट करने और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप हैं। अदालत ने साफ कहा कि प्रभावशाली व्यक्ति होने या राजनीतिक संपर्क होने से कानून के सामने कोई विशेषाधिकार नहीं मिलता।
सुनवाई के दौरान अदालत ने समाज की एक कड़वी सच्चाई की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह दुखद है कि भारत में कई महिलाएं गंभीर खतरे और अत्याचार झेलने के बावजूद विवाहिक रिश्ते में बनी रहती हैं। न्यायालय के अनुसार, इसके पीछे सामाजिक दबाव, पारिवारिक मर्यादाओं का भय और अलग होने या तलाक लेने पर मिलने वाला सामाजिक कलंक एक बड़ी वजह है।
आरोपितों की ओर से दलील दी गई कि वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं, पुलिस के समक्ष पेश हुए हैं और फरार होने की कोई संभावना नहीं है। इसके बावजूद हाईकोर्ट ने माना कि मामले की प्रकृति अत्यंत गंभीर है और ऐसे में अग्रिम जमानत देना उचित नहीं होगा।
अदालत ने यह भी कहा कि घरेलू हिंसा केवल एक पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक अपराध है, जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। प्रभावशाली होने के कारण यदि आरोपितों को राहत दी जाती है तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा।
इस फैसले को महिला सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे यह संदेश गया है कि कानून सभी के लिए समान है और किसी भी महिला के साथ होने वाले अन्याय को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।






