कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर गोविंदा टोली ने शुरू की तैयारी – राजधानी भोपाल के कई इलाकों में फोड़ी जाएगी मटकी

कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर गोविंदा टोली ने शुरू की तैयारी
– राजधानी भोपाल के कई इलाकों में फोड़ी जाएगी मटकी
भोपाल यशभारत। भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव जन्माष्टमी को लेकर तैयारियां शुरु हो गई है। कृष्ण मंदिरों के विशेष रूप से सजाया जा रहा है। इसके साथ ही विभिन्न तरह के आयोजन भी किए जाएंगे। राजधानी भोपाल में त्योहार को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। कृष्ण जन्माष्टमी पर आयोजित होने वाले मटकी फोड़ प्रतियोगिता को लेकर गोविंदा टोली ने भी तैयारी कर दी है। भोपाल के श्री हनुमान कुंड कर्बला में मटकी फोड़ के लिए युवाओं का समूह अभ्यास में जुटा है। आयोजन समिति के अध्यक्ष विक्रम रैकवार ने बताया कि पिछले कई दिनों से इसका अभ्यास किया जा रहा है। शहर में अन्य जगह भी इस तरह के आयोजन किए जाएंगे जिसमें गोविंदा टोली शामिल होगी।
भगवान कृष्ण की लीलाओं से है मटकी फोड़ का संबंध
जन्माष्टमी पर्व का जश्र मटकी फोडऩे के बिना अधूरा माना जाता है। मटकी फोडऩे की परंपरा भगवान श्रीकृष्ण के बाल्यकाल की लीलाओं से है। समिति अध्यक्ष विक्रम रैकवार ने बताया कि भगवन श्रीकृष्ण जब छोटे थे ततो अपने दोस्तों के साथ मक्खन चुराने के लिए मटकी फोड़ दिया करते थे। इस परंपरा को दही हांडी के नाम से भी जाना हाता है। इस पर्व के अवसर पर लडक़ों की टोली मअकी फोडऩे की प्रतियोगिता में भाग लेती।
ऊंचाई पर बांधी जाती है मटकी
मटकी को ऊंचाई पर बांध ाजाता है। एक लडक़ा दूसरे लडक़े के कंधे पर चढ़ता हौ और यह खेल तब तक चलता है जब तक मटकी टूट जाती है। मटकी फोडऩे की तैयारी उत्साह से की जाती है। इसमें लडक़ों की टोली को गोविंदा कहा जाता है। एक पिरामिड बनाकर मटकी तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। यह खेल सिर्फ मजेदार नहीं होता बल्कि टीम वर्क और संतुलन और धैर्य का भी होता है। मकी के अंदर दही, मक्खन और अन्य चीजें भी भरी होती हैं और इसे तोडऩे वाला गोविंदा जीतता है तो उसे सम्मानित भी किया जाता है।
इनामी राशि के रूप में बदला स्वरूप
मटकी फोड़ प्रतियोगिता का स्वरूप अब समय के साथ बदल गया है। गोविंदा टोलियों के मटकी फोडऩे पर इनाम भी मिलता है। यह इनामी राशि लाखों रुपए तक होती है। राजधानी भोपाल में भी जगह जगह मटकी फोड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। समिति अध्यक्ष विक्रम रैकवार ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण का जन्म रात के समय हुआ थ। इसलिए जन्माष्टमी की रात का अधिक महत्व रहता है। भक्त उपवास रखते हैं और मंदिरों में जागरण करते हैं। रात के १२ बजते ही मंदिरों में विशेष पूजन अर्चना की जाती है।







