व्यंग्य और संगीत का तीखा संगम बना घासीराम कोतवाल

व्यंग्य और संगीत का तीखा संगम बना घासीराम कोतवाल
भोपाल यश भारत । रविंद्र भवन के हंसध्वनि सभागार में रंगा थियेटर समूह द्वारा आयोजित इंडीमून्स आर्ट्स फेस्टिवल के तीसरे दिन शनिवार को मंचित नाटक घासीराम कोतवाल ने दर्शकों को व्यंग्य, सत्ता और संगीत के सशक्त मिश्रण से रूबरू कराया। संजय मिश्रा की प्रभावशाली प्रस्तुति ने इस क्लासिक कृति को नए आयाम देते हुए दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।
मराठी रंगमंच के प्रख्यात नाटककार विजय तेंदुलकर द्वारा रचित यह नाटक 1972 में पहली बार मंचित हुआ था। इसकी पृष्ठभूमि 18वीं सदी के पुणे में रची गई है, जहां सत्ता नैतिकता और मानवीय लालसाओं के टकराव को तीखे व्यंग्य के साथ प्रस्तुत किया गया है। नाटक का केंद्रीय पात्र घासीराम एक महत्वाकांक्षी व्यक्ति है, जो अपनी चतुराई से कोतवाल के पद तक पहुंचता है, लेकिन सत्ता के मद में वह दमनकारी शासक बन जाता है। गरीबों पर अत्याचार और अमीरों के प्रति पक्षपात उसके पतन का कारण बनते हैं। संजय मिश्रा ने इस जटिल किरदार को गहराई और सहजता के साथ मंच पर जीवंत किया। उनके अभिनय में व्यंग्य की तीक्ष्णता, हास्य और सत्ता की कठोरता का संतुलन देखने को मिला।
प्रस्तुति का संगीत और नाट्य विन्यास इसकी विशेषता रहा। लोकधुनों पर आधारित संगीत, पारंपरिक शैली, रंगीन वेशभूषा और सजीव मंच सज्जा ने दर्शकों को उस युग में ले जाने का सफल प्रयास किया। तीखे संवादों ने सामाजिक और राजनीतिक विसंगतियों पर सीधा प्रहार किया। यह प्रस्तुति इस बात का प्रमाण बनी कि क्लासिक कृतियां समय के साथ और अधिक प्रासंगिक होती जाती हैं।
पैनल चर्चा में थिएटर के बैकस्टेज पर हुई बात
फेस्टिवल के तीसरे दिन बिहाइंड द सीन्स द रियल ड्रामा विषय पर पैनल चर्चा भी आयोजित हुई, जिसका संचालन डॉ. सीमा रायजादा ने किया। इस दौरान संजय मिश्रा, राजीव वर्मा, मनोज नायर, कमल जैन और मलय जैन ने थिएटर के विभिन्न पहलुओं पर अपने अनुभव साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि थिएटर में बैकस्टेज की भूमिका बेहद अहम होती है और यही किसी भी प्रस्तुति की असली नींव होती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में भी लाइव थिएटर की प्रासंगिकता बरकरार रहने पर जोर दिया गया।
शायरी ऑन व्हील्स ने बांधा समां
ओपन स्टेज पर शायरी ऑन व्हील्स के तहत बैंड लय ने बॉलीवुड गीतों को नए अंदाज में पेश किया, वहीं शिवाजी की बांसुरी की धुनों ने माहौल को सुरमयी बना दिया। अनुज अजीत सिंह, सजल, निधि कौशिक और मोहित सक्सेना ने अपनी शायरी से दर्शकों का दिल जीत लिया।







