दिल्ली में आकर ग़ालिब पड़े मुसीबत में
विवेचना के 31 वें राष्ट्रीय नाट्य समारोह का तीसरा दिन

जबलपुर,यशभारत। विवेचना थियेटर ग्रुप एवं एमपी पावर मैनेजमेंट कपंनी लि, केन्द्रीय क्रीड़ा परिषद के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित विवेचना के 31 वें राष्ट्रीय नाट्य समारोह का तीसरा दिन यादगार बन गया। 19 वीं सदी के मिर्ज़ा ग़ालिब आज के समय में दिल्ली पंहुच गए हैं। उनका पुनर्जन्म हुआ है। उनको कोई पहचानता नहीं। वो परेशान हैं मगर उनकी परेशानी से दर्शक हंस हंस कर पागल हुए जा रहे हैं। गालिब को अपने मकान में घुसने नहीं मिल रहा है। वो सर्वेंट क्वार्टर में रह रहे हैं। मकान मालकिन बत्तमीजी करती है। उनकी ग़ज़लों को सब महान गायकों के नाम से जानते हैं। नाटक के संवाद ऐसे हैं कि पूरे दो घंटे तरंग की दीवारों से हंसी की आवाज़ें टकराती रहीं। तालियां बजती रहीं। ’गालिब इन न्यू दिल्ली’ नाटक भारत का सबसे लंबे समय तक चलने वाला हास्य नाटक है।

यह 19वीं सदी के प्रसिद्ध कवि मिर्ज़ा ग़ालिब के 21वीं सदी में नई दिल्ली में पुनर्जन्म का एक बेहद मज़ेदार किस्सा है, जिसमें उनके संघर्षों, परेशानियों और क्लेशों को दर्शाया गया है – 1997 में शुरू हुई इस ज़बरदस्त कॉमेडी में, महान उर्दू शायर मिर्ज़ा ग़ालिब अपनी प्रिय ’देहली’, जिसे अब ’दिल्ली’ कहा जाता है को देखने आते हैं। वो देखना चाहते हैं कि आज के समय में उनको और उनकी शायरी का लोग कितना आदर करते हैं।
पूरी कहानी ग़ालिब की पहचान के संकट से जूझने के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी शुरुआत उनकी ’हवेली’ के निवासियों द्वारा उन्हें ग़ालिब का ’जिन्न’ समझने की भूल से होती है। इसके चलते उन्हें दिल्ली में पढ़ने आए एक बिहारी छात्र जय हिंद के साथ एक सर्वेंट क्वार्टर में रहना पड़ता है। आगे हादसे पर हादसे होते हैं जो नाटक को धारदार और मज़ेदार बनाते हैं। आधुनिक समय में ग़ालिब जैसे पुराने ज़माने के कलाकार का क्या हश्र होता है? नाटक जो एक हँसी का पिटारा है पर कुछ गंभीर सवाल खड़े करता है। इस फ़िल्म का लेखन और निर्देशन डॉ. एम. सईद आलम ने किया है, जो हास्य और इतिहास के प्रति अपनी रुचि के लिए जाने जाते हैं।

नाटक का निर्देशन और लेखन डा एम सईद आलम ने किया है जो ग़ालिब की भूमिका भी निभाते हैं। सईद साहब का लक्ष्य है कि दर्शकों को हंसाना है। उनकी टीम में अंजू छाबड़ा,, हरीश छाबड़ा, अभिनव मिश्रा, अयमान अंसारी और शिखर चौधरी शामिल थे जो विविध भूमिकाएं निभा रहे थे। सेट, लाइट, मेकअप, वेशभूषा सभी नाटक के अनुकूल थे। नाटक के अंत में निर्देशक डा एम सईद आलम को समारोह का स्मृति चिन्ह भेंट किया गया है। इस अवसर पर अनिल श्रीवास्तव, बांकेबिहारी ब्यौहार, हिमांशु राय, बदरीश पांडेय, चिन्टू स्वामी, अजय धाबर्डे, आदित्य रूसिया, शुभम पांडेय आदि उपस्थित थे।

आज का नाटक
विवेचना के 31 वें राष्ट्रीय नाट्य समारोह के चौथे दिन शनिवार को अंक मुम्बई के कलाकार प्रीता माथुर ठाकुर के निर्देशन में ’आपस की बात’ नाटक का मंचन तरंग प्रेक्षागृह रामपुर जबलपुर में संध्या 7.30 बजे करेंगे।







