जबलपुरमध्य प्रदेशराज्य

एकता चौक से ज़ीरो डिग्री तक बिना नंबर की काली गाड़ियों का तांडव, पांच थानों की सीमा में बेखौफ काफिलेबाज़ी, कानून से ज़्यादा काफिलों का दबदबा

जबलपुर। शहर में इन दिनों सड़कों पर कानून से ज़्यादा दबदबा बिना नंबर प्लेट की काली गाड़ियों के काफिलों का नजर आ रहा है। एकता चौक से लेकर ज़ीरो डिग्री तक 8 से 10 काली गाड़ियाँ एक साथ हुजूम बनाकर काफिले की शक्ल में घूमती रहीं। चौंकाने वाली बात यह रही कि इन सभी गाड़ियों पर न तो रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज था और न ही किसी प्रकार की अस्थायी नंबर प्लेट दिखाई दी।

सोशल मीडिया के लिए खुलेआम शक्ति प्रदर्शन

इन काफिलों में सवार लोग अपनी ही गाड़ियों के वीडियो बनाते हुए सोशल मीडिया पर खुलेआम ताकत दिखाते नजर आए। यह पूरा घटनाक्रम किसी आयोजन, अनुमति या वैधानिक प्रक्रिया के तहत नहीं था, बल्कि केवल दबदबा बनाने और भय का माहौल खड़ा करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

पांच थानों की सीमा में आतंक

यह पूरा मार्ग किसी एक थाना क्षेत्र तक सीमित नहीं था, बल्कि विजयनगर, लॉर्डगंज, माढ़ोताल, संजीवनी नगर और भेड़ाघाट जैसे पांच प्रमुख थानों की सीमा में फैला हुआ था। इसके बावजूद कहीं भी इन बिना नंबर की गाड़ियों को रोकने, जांच करने या कार्रवाई करने की कोई ठोस पहल होती नजर नहीं आई।

ट्रैफिक नियमों की खुली धज्जियां

स्थानीय लोगों के अनुसार काफिले में शामिल गाड़ियाँ जानबूझकर एक साथ चल रही थीं, जिससे सड़क पर ट्रैफिक बाधित हुआ और आम वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बिना नंबर प्लेट के वाहनों का इस तरह सड़कों पर चलना मोटर व्हीकल एक्ट का सीधा उल्लंघन है, लेकिन यहां नियमों को ताक पर रख दिया गया।

बसा गांव की महिलाओं ने दिखाई साहसिक पहल

जहां पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं बसा गांव की महिलाओं ने एक दिन साहस दिखाते हुए इन बिना नंबर की काली गाड़ियों के काफिले का विरोध किया और हुड़दंग मचा रहे लोगों को खदेड़ दिया। महिलाओं की इस पहल के बाद क्षेत्र में कुछ समय के लिए शांति बनी।

निगरानी तंत्र पर खड़े हुए गंभीर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर बिना नंबर प्लेट की इतनी सारी गाड़ियाँ पांच थानों की सीमा में कैसे घूमती रहीं? क्या यह सब जानकारी के बावजूद हुआ या फिर व्यवस्था पूरी तरह विफल रही?

कानून-व्यवस्था के लिए चेतावनी

स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि समय रहते इस तरह की काफिलेबाज़ी और शक्ति प्रदर्शन पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह केवल ट्रैफिक की समस्या नहीं रहेगी, बल्कि कानून-व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती बन जाएगी।

जनता की मांग: अब सख्त कार्रवाई जरूरी

क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि बिना नंबर प्लेट के वाहनों की पहचान कर उन्हें जब्त किया जाए, सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया वीडियो के आधार पर जिम्मेदार लोगों को चिन्हित किया जाए और भविष्य में इस तरह की गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।

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