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परिवार वाले बना रहे थे शादी का दबाव इसलिए खुद रची भागने की साजिश  – हैदराबाद में तीन दिन रुकने के बाद काठमांडू पहुंच गई थी अर्चना 

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परिवार वाले बना रहे थे शादी का दबाव इसलिए खुद रची भागने की साजिश
– हैदराबाद में तीन दिन रुकने के बाद काठमांडू पहुंच गई थी अर्चना
भोपाल यशभारत। रानी कमलापति स्टेशन से 7 अगस्त को रहस्यमय ढंग से लापता हुई कटनी निवासी अर्चना तिवारी को ढूंढने में जीआरपी अमले ने सफलता प्राप्त कर ली है। अर्चना ने पूछताछ के दौरान जो जानकारी दी है वह चौंकाने वाली है। अर्चना के परिवार वाले उस पर शादी का दबाव बना रहे थे, इसलिए उसने घर से भागने की साजिश रची। तीन बार पहले भी शादी का रिश्ते ठुकरा चुकी थी। जीआरपी भोपाल की टीम ने नेपाल बार्डर से सटे लखीमपुर खीरी के धनगढ़ी शहर से ढूंढ निकाला। अर्चना ने अपने दोस्त शुजालपुर निवासी सारंश जोकचंद व सारंश के क्लाइंट पंजाब निवासी तेजिंदर के साथ मिलकर साजिश रची थी। मंगलवार सुबह जैसे ही अर्चना ने मां से बात की तो मां ने उसका लोकेशन पूछ लिया और इसकी जानकारी तुरंत जीआरपी के अधिकारियों को दी। लोकेशन के आधार पर जीआरपी अमले ने कार्रवाई करते हुए अर्चना को उप्र के लखीमपुर खीरी जिले के धनगढ़ी शहर में ढूंढ निकाला।
सिविल जज की तैयारी कर रही कटनी निवासी अर्चना तिवारी की भोपाल जीआरपी में परिजनों ने गुमशुदगी दर्ज कराई थी। अर्चना की तलाश में पिछले १२ दिनों से जगह जगह सर्चिंग अभियान चलाया गया। भोपाल से लेकर मिडघाट के जंगलों में भी जीआरपी और स्थानीय पुलिस का अमला उतरा था।
एसपी रेल राहुल लोढ़ा ने किया मामले का खुलासा
रेल एसपी राहुल लोढ़ा ने पत्रकार वार्ता के दौरान पूरे मामले का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि ७ अगस्त को ट्रेन 18233 नमर्दा एक्स, कोच बी-3 बर्थ नम्बर 03 पर अर्चना तिवारी पिता स्व. शरद नारायण तिवारी उम्र 29 वर्ष निवासी मंगलनगर थाना रंगनाथ नगर जिला कटनी (म.प्र.) पर अपने घर जाने की यात्रा कर रही थी।  जो अपने घर नहीं पहुंची थी। भाई अंकुश तिवारी ने ८ अगस्त को जीआरपी कटनी में बहन के गुम होने की शिकायत दर्ज कराई थी।  जीआरपी थाना कटनी द्वारा शून्य पर गम इंसान की कायमी कर घटना स्थल स्टेशन रानी कमलापति का होने से जीआरपी थाना कटनी से डायरी प्राप्त होने पर थाना जीआरपी रानी कमलापति में असल गुम इंसान क्रमांक 5/25 दिनांक को कायम कर जांच में लिया गया। गुम महिला अचर्ना तिवारी हाई कोर्ट में एडवोकेट एवं सिविल जज तैयारी इंदौर में रहकर कर रही थी।
जीआरपी ने चलया सर्चिंग अभियान
नर्मदा नदी में लगभग 32 किलोमिटर तक एसडीआरएफ एवं जीआरपी द्वारा सर्च ऑपरेशन चलाया गया व रानी कमलापति से जबलपुर तक अलग-अलग टीमें बनाकर पैदल सचिंग कराई गई एवं बरखेड़ा से बुदनी तक वन विभाग के साथ जीआरपी की टीमों के साथ जंगल में सर्च ऑपरेशन चलाया गया, बाद इलेक्ट्रोनिक संसाधानो के माध्यम से संदेही के नंबर की जानकारी प्राप्त की गई, जिस पर से इंदौर एवं शुजालपुर में संदेही की पहचान सारांश जोकचंद के रूप में की जाकर पूछताछ की गई। जिसके बाद उप्र लखीमपुर के धनगढ़ी से अर्चना को बरामद कर लिया गया।
परिवार वाले बोले पटवारी लडक़ा देखा है शादी करनी ही पड़ेगी
पूछताद पुछताछ में अर्चना तिवारी ने बताया की मेरे घर वाले मेरी मर्जी के खिलाफ मेरे लिए शादी के रिश्ते देख रहे थे कुछ दिन पहले मेरे घरवालो द्वारा बताया गया की तुम्हारे रिश्ते के लिये एक पटवारी लडक़ा देखा है और इसी प्रकार बार-बार शादी करने के लिए मजबूर कर रहे थे । अर्चना के मुताबिक मानसिक रूप से परेशान हो गई थी। ७ अगस्त को इंदौर से कटनी के लिए ट्रेन 18233 इंदौर नमर्दा एक्सप्रेस से रवाना हुई। मैं मानसिक रूप से घर जाने के लिए तैयार नहीं थी रक्षाबंधन के कारण मे पर जाने के लिए रवाना हो गई परंतु मैने सोच लिया की में अब घर नहीं जाउंगी और न ही शादी करूंगी। अब तक में सिविल जज नहीं बन जाती फिर मैने सोचते सोचते रेलवे स्टेशन इटारसी पहुंचने से पहले मैंने अपने पुराने क्लाइंट तेजेन्दर सिंह जो पंजाब का रहने वाला है वर्तमान में इटारसी में रहता है उससे मदद मांगी।
दोस्त सारांश को इटारसी बुलाया
अर्चना ने बताया कि तेजेंदर से कहा कि मुझे इटारसी उतरकर वापस इंदौर जाना है। फिर मैंने अपने दोस्त सारांश को भी फोन लगा कर इटारसी बुला लिया था। मैंने इटारसी उतरने से पूर्व ही तेजेंदर को बताया दिया था कि जहां इटारसी स्टेशन पर कैमरे न लगे हो वहा उतार लेना, फिर तेजेंदर नमर्दापुरम स्टेशन से मेरे साथ हो गया। तेजेंदर ने मुझे इटारसी में मेरे दोस्त सारांश के साथ भेज दिया और तेजेंदर इटारसी में रूक गया था। फिर मैं सारांश के साथ उसकी कार में बैठकर शुजालपुर आ गई थी।
हैदाराबाद में बिताए तीन दिन
शुजालपुर से इंदौर निकल गई थी इंदौर में घरवालो के आ जाने के डर के कारण विचार के उपरांत में हैदराबाद चली गई।  हैदराबाद में 2-3 दिन रूकने के उपरांत पेपर एवं मीडिया रिपोर्ट से मुझे यह जानकारी मिली गई भी मेरा केस काफी चर्चित हो जाने कारण सुरक्षित महसुस नहीं कर रही थी।  फिर में सारांश के साथ दिनांक 11 अगस्त को हैदराबाद से दिल्ली पहुंच गई  और  दिल्ली से टेक्सी से सारांश के साथ धनगढ़ी नेपाल पहुंच गई फिर धनगुढ़ी से काठमांडू पहुंच गई जहां सारांश ने अपने परिचित वावपी देवकोटा से बात कराकर किसी होटल में रुकवावा ओर सारांश वापस इंदौर चला गया।
नेपाल की सिम का कर रही थी उपयोग
कुछ दिन बाद देवकोटा ने मुझे एक नेपाल की सिम दिलवा दी थी जिससे में वाट्सअप के माध्यम से सारांश से बात करती रही। सारांश ओर तेजेंदर ने दोस्त होने के कारण मेरी मदद की थी जिससे में नेपाल तक पहुंच गई थी किसी भी व्यक्ति द्वारा मी साथ कोई गलत हरकत की गई ना ही गलत काम किया गया था। सारांश के माध्यम से पुलिस ने मुझसे संपर्क किया ओर बताया कि आपके परिवार वाले बहुत परेशान है वापस आ जाओ बाद में काठमांडू से प्लेन से धनगढ़ी आई। नेपाल बॉर्डर लखीमपुर पहुंची जहां पर मध्यप्रदेश बीआरपी पुलिस भोपाल की टीम मिले जिनके साथ में जीआरपी थाना रानी कमलापति आ गई।
जीआरपी आरक्षक राम तोमर कराई थी टिकट
मंगलवार को मामले में नया मोड तब आया जब ग्वालियर के भंवरपुर थाने के आरक्षक राम तोमर का नाम सामने आया। राम तोमर को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। राम ने ही अर्चना की टिकट इंदौर से ग्वालियर की कराई थी। मामले का रोचक पहलू यह है कि अर्चना उक्त ट्रेन में सफर कर ही नहीं रही थी बल्कि बस से सफर किया था। ग्वालियर में राम तोमर के संपर्क में थी। आखिर ट्रेन में बैग रखना और सभी को गुमराह करने के पीछे की मंशा किसकी थी इसकी जानकारी नहीं लग सकी है।
अर्चना तिवारी मिसिंग केस में कब क्या हुआ
7 अगस्त – अर्चना इंदौर से नर्मदा एक्सप्रेस से कटनी जाने के लिए निकली। रात 10 बजकर 16 मिनट पर अर्चना ने अपनी चाची से फोन पर बात की। नर्मदापुरम के आसपास अर्चना तिवारी का फोन स्विच ऑफ हो गया।
8 अगस्त – अर्चना तिवारी कटनी रेलवे स्टेशन पर नहीं उतरी। उमरिया में ट्रेन की बर्थ पर अर्चना का बैग मिला।
9 अगस्त – कटनी रेलवे पुलिस में परिजन ने अर्चना तिवारी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
11 अगस्त – पुलिस ने हॉस्टल के फुटेज खंगाले, अर्चना फोन पर किसी से बात करती नजर आई।
13 अगस्त – सर्च ऑपरेशन तेज किया गया। साइबर सेल, होमगार्ड के गोताखोरों की टीमों ने तलाश की।
14 अगस्त – अर्चना के परिवार ने एसपी से मुलाकात की और कुछ संदिग्धों के नाम पुलिस को दिए।
16 अगस्त – देशभर में सर्चिंग अभियान चलाया गया। लेकर देश के हर हिस्से में अर्चना की तलाश शुरू हुई।
17 अगस्त – जीआरपी, पुलिस और वन विभाग की टीम ने मिडघाट के जंगल में 25 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक पर सर्चिंग की।
18 अगस्त – संयुक्त टीम ने मिडघाट के जंगल में तलाशी अभियान और तेज किया।
19 अगस्त – भंवरपुर थाने के कॉन्स्टेबल राम तोमर को हिरासत में लिया गया। अर्चना के लिए उसने बस की टिकट बुक की थी। इसके बाद अर्चना तिवारी की परिवारवालों से बात हुई और उसके सुरक्षित होने का पता चला।
जांच की जा रही है
अर्चना को सकुशल लाया गया है। उसके बयान लेने के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकी है। परिवार वाले शादी का दबाव बना रहे थे।
– राहुल लोढ़ा, एसपी, रेल भोपाल

 

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