भोपाल में सादगी के साथ मनाई गई ईद-उल-फितर, काली पट्टी बांधकर जताया विरोध

भोपाल में सादगी के साथ मनाई गई ईद-उल-फितर, काली पट्टी बांधकर जताया विरोध
शिया समुदाय ने नमाज़ के दौरान दिखाई एकजुटता, अमन ,शांति और इंसाफ के लिए मांगी दुआएं
भोपाल, यश भारत । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इस वर्ष ईद उल फितर का पर्व सादगी, गंभीरता और संवेदनशील माहौल के बीच मनाया गया। जहां आमतौर पर ईद पर खुशियों और उत्साह का माहौल देखने को मिलता है, वहीं इस बार शहर में कई स्थानों पर सादगी और आत्मचिंतन का माहौल नजर आया। शहर के करोंद क्षेत्र स्थित मस्जिद आले मोहम्मद शिया जामा मस्जिद में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने एकत्र होकर ईद की नमाज़ अदा की। नमाज़ के दौरान अनुशासन और श्रद्धा का विशेष माहौल देखने को मिला। लोग सुबह से ही मस्जिद पहुंचने लगे थे और नमाज़ के बाद एक दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी, हालांकि माहौल में एक अलग तरह की गंभीरता भी महसूस की गई। इस दौरान 28 फरवरी को हुए हमले में खामेनेई साहब की शहादत को याद करते हुए शिया समुदाय के लोगों ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। नमाज़ के दौरान लोगों ने अपने हाथों में काली पट्टी बांधकर ज़ुल्म के खिलाफ अपनी आवाज दर्ज कराई। यह प्रतीकात्मक विरोध न केवल शहादत को श्रद्धांजलि देने का माध्यम बना, बल्कि समाज में न्याय और मानवाधिकारों के समर्थन का संदेश भी देता नजर आया। नमाज़ के बाद विशेष दुआओं का आयोजन किया गया, जिसमें देश और दुनिया में अमन, शांति और इंसाफ कायम रहने की कामना की गई। मौलाना ने अपने खुत्बे में कहा कि ईद-उल-फितर सिर्फ खुशियां मनाने का पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, त्याग, सब्र और इंसानियत का संदेश देने वाला अवसर है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे समाज में भाईचारा बनाए रखें और हर प्रकार के अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाएं। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा समय में दुनिया के कई हिस्सों में हो रहे संघर्ष और अत्याचार चिंता का विषय हैं, ऐसे में समाज के हर वर्ग को एकजुट होकर शांति और मानवता के मूल्यों को मजबूत करना चाहिए। नमाज़ के बाद लोगों ने एक दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी, लेकिन इस बार जश्न की जगह सादगी और संवेदनशीलता अधिक दिखाई दी। कई लोगों ने बताया कि इस बार उन्होंने ईद को सामान्य उत्सव की तरह नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी और संदेश के रूप में मनाया है। गौरतलब है कि देशभर में 21 मार्च 2026 को चांद दिखने के बाद ईद-उल-फितर का पर्व मनाया गया। यह पर्व पवित्र रमज़ान महीने के समापन का प्रतीक होता है, जिसमें रोज़ा रखने के बाद लोग अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं और समाज में प्रेम, भाईचारे और आपसी सौहार्द का संदेश फैलाते हैं।







