साहित्य की खुशबू से महकी संस्कारधानी: डॉ. गायत्री तिवारी की स्मृति में साहित्यकारों का सम्मान

साहित्य की खुशबू से महकी संस्कारधानी: डॉ. गायत्री तिवारी की स्मृति में साहित्यकारों का सम्मान
विमोचित हुई डॉ. भावना शुक्ला और डॉ. कामना कौस्तुभ की पुस्तकें; भावुक क्षणों के बीच हुआ आयोजन
जबलपुर,यश भारत। शहर की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के उद्देश्य से रविवार को भंवरताल स्थित ‘कला वीथिका’ में ‘गायत्री स्मृति सम्मान समारोह’ का भव्य आयोजन किया गया। डॉ. गायत्री तिवारी की स्मृति को समर्पित इस कार्यक्रम में जहाँ एक ओर वरिष्ठ रचनाकारों को सम्मानित किया गया, वहीं दूसरी ओर दो महत्वपूर्ण साहित्यिक कृतियों का विमोचन भी संपन्न हुआ।
समारोह में इस वर्ष डॉ. गायत्री कथा सम्मान से इंजीनियर इस्मिता माथुर को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही उनके साहित्यिक एवं सामाजिक योगदान को दृष्टिगत रखते हुए श्रीमती मीना भट्ट को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दो साहित्यिक पुस्तकों का विमोचन किया गया। डॉ. भावना शुक्ला की पुस्तक “ख्वाहिश एक सैनिक की” तथा डॉ. कामना कौस्तुभ की पुस्तक “भाव और भाषा की निर्दोष प्रार्थनाएं” का लोकार्पण इसी अवसर पर संपन्न हुआ।
डॉ. कामना कौस्तुभ की पुस्तक के संदर्भ में यह विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा कि पुस्तक का नाम उनके पिताजी द्वारा अपने जीवनकाल में ही चयनित किया गया था, जिससे यह कृति भावनात्मक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बन गई। यह पुस्तक लेखिका द्वारा अपने माता-पिता को समर्पित की गई है। इस पुस्तक का विमोचन भी इसी समारोह में किया गया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने डॉ. गायत्री तिवारी के व्यक्तित्व, कृतित्व तथा साहित्य और समाज के प्रति उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। आयोजकों के अनुसार ऐसे आयोजन साहित्यिक मूल्यों को सहेजने और नई पीढ़ी को प्रेरणा देने का कार्य करते हैं।
समारोह कला वीथिका, भंवरताल उद्यान के पास, जबलपुर में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी, रचनाकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।






