
मुंबई, यश भारत
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में वर्ष 2025 के दौरान भ्रष्टाचार के मात्र 39 ट्रैप मामले दर्ज होने से प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। अधिकारियों का मानना है कि कम आंकड़े भ्रष्टाचार में कमी नहीं बल्कि मामलों की कम रिपोर्टिंग का संकेत हो सकते हैं।
महाराष्ट्र एंटी करप्शन ब्यूरो (ए सी बी ) के आंकड़ों के अनुसार पूरे राज्य में पिछले वर्ष कुल 669 ट्रैप केस दर्ज किए गए, जिनमें 989 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें मुंबई का हिस्सा केवल 6 प्रतिशत रहा, जो राज्य के अन्य शहरों की तुलना में काफी कम है। आंकड़ों के अनुसार नाशिक 138 मामलों के साथ राज्य में सबसे ऊपर रहा, जबकि पुणे में 121 और छत्रपति संभाजीनगर में 109 मामले दर्ज किए गए। ठाणे में भी 82 केस सामने आए, जो मुंबई से कहीं अधिक हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मुंबई जैसे बड़े महानगर में भ्रष्टाचार के मामले कम दर्ज होना इस बात का संकेत हो सकता है कि लोग शिकायत दर्ज कराने से बचते हैं या प्रक्रिया को जटिल मानते हैं। महामारी के बाद से ट्रैप मामलों में गिरावट का रुझान भी देखा गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण के लिए शिकायत तंत्र को मजबूत करना, गुप्त शिकायत व्यवस्था को भरोसेमंद बनाना और नागरिकों में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है, तभी वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।






