जनसैलाब के बीच आस्था के साथ निकला ऐतिहासिक मुख्य दशहरा चल समारोह

जबलपुर,यशभारत। संस्कारधानी की ऐतिहासिक धरोहर और सांस्कृतिक वैभव का प्रतीक 162वां दशहरा चल समारोह कल अपार जनसैलाब, भक्तिमय माहौल और देशभक्ति के अनूठे मेल के बीच अत्यंत हर्षोल्लास व भव्यता के साथ संपन्न हुआ। शहर के मुख्य मार्गों पर उमड़ी अपार जनमेदिनी ने भगवान श्रीराम के जयकारों और माँ काली की भक्ति में डूबकर इस अमर परंपरा का गवाह बनने का गौरव प्राप्त किया। चल समारोह की शुरुआत में सबसे आगे रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशालकाय पुतले चल रहे थे, जो बुराई पर अच्छाई की विजय के महान संदेश की याद दिला रहे थे। उनके पीछे जीवंत झांकियों का ऐसा अद्भुत कारवां शुरू हुआ, जिसने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

नुनहाई-सुनरहाई का वैभव

झांकियों के क्रम में आगे दशानन रावण की विशाल एवं सजीव झांकी चल रही थी। उसके ठीक पीछे प्रभु श्रीराम, भ्राता लक्ष्मण और महावीर हनुमान के साथ दिव्य रथ पर सवार होकर निकल रहे थे, जिनके दर्शन के लिए मार्ग के दोनों ओर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ एकत्र रही। नुनहाई-सुनरहाई की भव्य प्रतिमाएं: चल समारोह में अपने अद्वितीय वैभव, कलात्मक सुंदरता और अलौकिक आकर्षण के लिए प्रख्यात नुनहाई और सुनहाई की भव्य प्रतिमाएं शामिल हुईं। जैसे ही ये प्रतिमाएं जनसमूह के सामने आईं, पूरा वातावरण श्रद्धालुओं के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। संस्कृति और कला का अद्भुत प्रदर्शन: जुलूस के साथ चल रहे दर्जनों प्रसिद्ध बैंड-बाजे, पारंपरिक दुलदुल घोड़ी के नृत्य और विभिन्न सांस्कृतिक कला दलों ने लोकनृत्य व वादन से ऐसा समां बांधा कि सड़क पर उपस्थित अपार जनसैलाब झूमने पर मजबूर हो गया। समारोह में बीस प्रतिमाएं शामिल हुईं। चल समारोह रात 8 बजे तीन पत्ती चौराहे से शुरू हुआ और सुबह तक चलता रहा इसका समापन हनुमानताल में हुआ।
‘बड़ी महाकाली की अलौकिक आभा से खिल उठा पूरा चल समारोह

रामलीला दशहरा चल समारोह के अंतिम चरण में गढ़ा फाटक की सुप्रसिद्ध ‘बड़ी महाकालीÓ का आगमन इस पूरे आयोजन का सबसे मुख्य, भव्य और रोमांचक आकर्षण सिद्ध हुआ। तड़के लगभग 4:00 बजे जैसे ही बड़ी महाकाली की प्रतिमा ने यातायात थाने के सामने से चल समारोह मार्ग में प्रवेश किया, पूरे क्षेत्र का दृश्य ही बदल गया। उनके आगमन से पूर्व ऐसा लग रहा था मानो चल समारोह अपने समापन की ओर है और मार्गों से भीड़ धीरे-धीरे छंटने लगी है। किंतु, जैसे ही माँ महाकाली की अलौकिक प्रतिमा सड़क पर उतरी, उनके साथ श्रद्धालुओं का एक ऐसा असीम और विशाल हुजूम चला कि पूरा मार्ग पल भर में जनता के सैलाब से खचाखच भर गया। माँ महाकाली के भव्य रूप, दिव्य आकर्षण और अलौकिक आभा ने विसर्जन मार्ग पर एक नया उत्साह और भक्तिमय माहौल फूंक दिया। जो सड़कें खाली सी नजर आने लगी थीं, वे माँ के जयकारों और जनमेदिनी की मौजूदगी से पुन: गूंज उठीं। गढ़ा फाटक की बड़ी महाकाली के इस भव्य आगमन ने पूरे चल समारोह को एक ऐतिहासिक और अविस्मरणीय ऊंचाई प्रदान कर दी।
162 वर्षों की अविरल परंपरा: ऐतिहासिकता और गरिमा

जबलपुर में विजयादशमी पर सार्वजनिक चल समारोह निकालने की यह परंपरा मध्य भारत की सबसे प्राचीन परंपराओं में से एक है। ब्रिटिश काल में सन् 1865 में श्री गोविंदगंज रामलीला समिति (मिलौनीगंज) द्वारा इस आयोजन की नींव रखी गई थी। गोविंदगंज रामलीला समिति के नेतृत्व में यह जुलूस मिलौनीगंज छोटा फुहारा से दोपहर बाद प्रारंभ होकर नगर निगम चौक पहुंचा, जहाँ से यह अपने निर्धारित पारंपरिक मार्गों से होते हुए आगे बढ़ा और अंत में मिलौनीगंज व छोटे फुहारे पर रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों का भव्य दहन किया गया।
‘यश भारत का भव्य मंच में आत्मीय स्वागत

ऐतिहासिक दशहरा चल समारोह के अवसर पर ‘यश भारत समाचार पत्र परिवार की ओर से मुख्य मार्ग पर एक विशाल एवं सुसज्जित स्वागत मंच लगाया गया था। इस मंच के माध्यम से चल समारोह में शामिल रामलीला पात्रों, झांकी संयोजकों और नगरवासियों का भव्य स्वागत किया गया। इसके साथ ही मंच से चल समारोह की शुरूआत में श्री गोविंदगंज रामलीला समिति के सदस्यों का स्वागत किया गया। वहीं रामलीला झांकियों के पीछे चल रही दुर्गा प्रतिमाओं के संचालकों व चल समारोह में कलाकारों का यशभारत के मंच से स्वागत किया गया एवं माता रानी की आराधना वैदिक विधि-विधान से की गई।
मनोज नामदेव का वही चिर-परिचित अंदाज

ऐतिहासिक दशहरा चल समारोह के दौरान मालवीय चौक पर स्थापित ‘यश भारत के मंच का सफल संचालन वरिष्ठ संचालक मनोज नामदेव द्वारा किया गया। दशकों से मालवीय चौक पर मंच संचालन करते आ रहे नामदेव का अनोखा और आत्मीय अंदाज हमेशा की तरह जन आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। इस ऐतिहासिक समारोह के कई दशकों के साक्षी रहे मनोज नामदेव समितियों के सदस्यों से लेकर चल समारोह में शामिल कलाकारों तक, हर एक व्यक्ति को नाम से जानते हैं। उनके इस गहरे अनुभव और सहज जुड़ाव का सीधा लाभ ‘यश भारतÓ के मंच को मिला, जिसने कार्यक्रम की भव्यता में चार चांद लगा दिए।
समसामयिक एवं वैश्विक मुद्दे

इस बार की झांकियों में धार्मिक परंपरा के साथ-साथ जेनजी संस्कृति, अमेरिका-इजरायल युद्ध, हामुर्ज जैसी समसामयिक अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर आधारित बेहद अनूठी झांकियां शामिल रहीं, जिन्होंने दर्शकों का विशेष ध्यान खींचा। शौर्य और डिफेंस सिस्टम: झांकियों की शृंखला में भारतीय सेना के उस शक्तिशाली एयर डिफेंस सिस्टम को भी दर्शाया गया जिसने हालिया ‘ऑपरेशन सिंदूर में अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन किया था। इसे देखकर नागरिकों का सीना गर्व से चौड़ा हो गया।








