केरवा की सीमा तय करने में फिर अड़ंगा, 29 अक्टूबर से पहले रिपोर्ट की चुनौती

केरवा की सीमा तय करने में फिर अड़ंगा, 29 अक्टूबर से पहले रिपोर्ट की चुनौती
– एनजीटी ने तीन सप्ताह में सीमांकन पूरा करने को कहा
– ड्रोन और सैटेलाइट सर्वे से होगी जांच, 33 अतिक्रमण पहले ही हो चुके हैं चिह्नित
भोपाल, यश भारत । केरवा जलाशय के एफटीएल और बफर क्षेत्र की वास्तविक सीमा तय करने की प्रक्रिया एक बार फिर अटक गई है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देश पर प्रस्तावित सर्वे और भौतिक सत्यापन स्थगित होने से जलाशय के आसपास मौजूद निर्माणों की स्थिति स्पष्ट होने में देरी हो रही है। अब समिति को तीन सप्ताह के भीतर सर्वे पूरा कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी है। मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को होगी। जलाशय के आसपास अतिक्रमण और निर्माणों की स्थिति सामने लाने के लिए ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट तस्वीरों और मौके पर सत्यापन की योजना बनाई गई है। इससे पहले क्षेत्र में 33 अतिक्रमण चिह्नित किए जा चुके हैं। इसके अलावा जलाशय की सीमा पर लगाए गए 1080 खंभों और कंक्रीट ब्लॉकों की स्थिति भी जांच के दायरे में रहेगी। सर्वे के जरिए निर्धारित सीमा और मौके पर मौजूद निर्माणों का मिलान किया जाएगा।
समयसीमा में सर्वे पूरा करना चुनौती – सर्वे बार-बार टलने से अब तय समय में रिपोर्ट तैयार करने की चुनौती बढ़ गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी नितेश चौरसिया ने प्रशासनिक व्यस्तता और अन्य जिम्मेदारियों को सर्वे स्थगित होने की वजह बताया है। हालांकि, सर्वे टलने के पीछे प्रभावशाली लोगों के निर्माणों को बचाने की किसी कोशिश की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। केरवा जलाशय के डूब क्षेत्र और कैचमेंट एरिया में मौजूद फार्म हाउस व अन्य निर्माणों को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं हैं। ऐसे में सीमांकन की रिपोर्ट से क्षेत्र में निर्माणों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
नक्शों और मौके की स्थिति का होगा मिलान – एनजीटी ने समिति को सरकारी रिकॉर्ड, जल संसाधन विभाग के कंटूर और टोपोग्राफिकल मैप तथा जलाशय की ऊंचाई के आधार पर एफटीएल और बफर क्षेत्र का अंतिम निर्धारण करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए ड्रोन सर्वे और सैटेलाइट इमेजरी के साथ जमीनी स्तर पर भौतिक सत्यापन किया जाएगा।






