वादियों से बेदखली का फरमान: जिसे अपना घर समझ बैठे थे दो हाथी, वहीं बिछ गया करंट और फंदों का जाल : मौत

रीवा। 23-24 फरवरी को दो हाथी का जोड़ा चुरहट के रास्ते मऊगंज पहुंचा था। तब से दोनों हाथी का जोड़ा यहीं रह गया था। उन्हें रीवा, मऊगंंज और मैहर की वादियां घूब भाने लगी थी। यहां से हाथी का जोड़ा वापस लौट कर जाना ही नहीं चाहता था। कई बार बिछड़े लेकिन फिर मिल गए। साथ में ही 6 महीनों से थे। घर और खेतों को थोड़ा बहुत नुकसान पहुंचाए लेकिन जनहानी नहीं की। किसी को मारा नहीं। हाथी समझदार थे लेकिन इंसान नहीं निकले। यही वजह है कि एक हाथी को इसकी कीमत चुकानी पड़ी। करंट लगने से मौत हो गई। एक की मौत के बाद दूसरा हाथी अकेला हो गया। अब अकेले में वह कुछ भी कर सकता है। यही वजह है कि बांधवगढ़ से टीम दो ट्रेंड हाथियों को लेकर मऊगंज पहुंची है। इन ट्रेंड हाथियों की मदद से भरत की घेराबंदी की जाएगी। उसे घेरा जाएगा। ट्रेंड हाथियों को एक ट्रक में भर कर लाया गया है। साथ ही एक ट्रक खाली भी पहुंचा है। यह भरत के लिए हैं।
इसी ट्रक में लादकर भरत को वापस बांधवगढ़ ले जाया जाएगा। बांधवगढ़ की टीम एक ट्रक और लेकर आई है। इसमें पिजड़ा है। यह हाथी भरत के लिए है। भरत को इसी ट्रक में भरकर ले जाएंगे। ऐसा ही रेस्क्यू सतना में भी किया गया था। वहां भी बांधगवढ़ से दो ट्रेंड हाथियों को लाया गया था। इसी तरह मऊगंज में भी योजना अपनाई जाएगी। दोनों ट्रेड हाथियों से भरत को पहले जंगल से सुरक्षित जगह पर लाया जाएगा। इसके बाद यदि भरत खुद ही ट्रक में चढ़ जाएगा तो ठीक है वर्ना डॉक्टरों की टीम उसे ट्रंकुलाइज करेगी। बेहोश होने के बाद क्रेन की मदद से पिटरे में कैद किया जाएगा







