भोपाल में म.प्र. हाईकोर्ट के 30वें मुख्य न्यायाधीश बने जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे, राज्यपाल ने दिलाई शपथ

भोपाल में म.प्र. हाईकोर्ट के 30वें मुख्य न्यायाधीश बने जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे, राज्यपाल ने दिलाई शपथ
भोपाल,यशभारत। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने गुरुवार को भोपाल स्थित लोकभवन में पद और गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने उन्हें शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, हाईकोर्ट के जज और अधिवक्ता मौजूद रहे। शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री निवास पर नए मुख्य न्यायाधीश के सम्मान में दोपहर के भोज का आयोजन किया गया।
जस्टिस कोगजे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 30वें मुख्य न्यायाधीश बने हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा उनके नाम की सिफारिश किए जाने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद केंद्र सरकार ने नियुक्ति की अधिसूचना जारी की थी। वे शुक्रवार से हाईकोर्ट में आधिकारिक रूप से अपना कार्यभार संभालेंगे। इससे पहले जस्टिस विवेक रसिया कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
33 वर्षों का कानूनी सफर
16 जुलाई 1969 को जन्मे जस्टिस कोगजे ने वर्ष 1990 में केमिस्ट्री से बीएससी और 1993 में एलएलबी की डिग्री हासिल की। उसी वर्ष उन्होंने गुजरात में वकालत की शुरुआत की। अपने 33 साल के कानूनी करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। वे आपराधिक मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं। वर्ष 2001 में असिस्टेंट गवर्नमेंट प्लीडर, 2002 से 2007 तक एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और 2008 में सेंट्रल एक्साइज एंड कस्टम्स डिपार्टमेंट के स्टैंडिंग काउंसल रहे। इसके अलावा 2011 में वे स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) और स्पेशल टास्क फोर्स के विशेष काउंसल नियुक्त हुए, जहां उन्होंने गोधरा दंगों से जुड़े कई संवेदनशील मामलों में राज्य सरकार का पक्ष रखा।
वे 6 अप्रैल 2016 को गुजरात हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश बने और 15 मार्च 2018 को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किए गए। मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल 15 जुलाई 2031 तक यानी लगभग चार वर्ष दस महीने का होगा।
गुजरात हाईकोर्ट में दिए कई अहम फैसले
गुजरात हाईकोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान जस्टिस कोगजे ने कई ऐतिहासिक और कड़े फैसले सुनाए:
हत्या मामले में जमानत निरस्त:पत्नी की हत्या के आरोपी पति की जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि आरोपी ने जांच को गुमराह करने और सबूत छिपाने का प्रयास किया।
कस्टोडियल डेथ पर सख्त रुख: ग्राम रक्षक दल के जवान द्वारा कस्टडी में दी गई बर्बर यातनाओं और मौत के मामले में आरोपी को जमानत देने से इनकार किया।
जल निकायों का संरक्षण: जलाशयों, तालाबों और झीलों के आसपास हो रहे अवैध लैंड फिलिंग पर चिंता जताते हुए पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा के निर्देश दिए।
श्रमिक अधिकार: स्पष्ट किया कि सुपरवाइजरी स्तर पर काम करने वाला व्यक्ति औद्योगिक विवाद नहीं उठा सकता, साथ ही लंबे समय से कार्यरत संविदा कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा की।







