सिवनी में अमृत 2.0 योजना में बड़ी गड़बड़ी उजागर, मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने PDMC कंपनी को जारी किया नोटिस

सिवनी में अमृत 2.0 योजना में बड़ी गड़बड़ी उजागर, मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने PDMC कंपनी को जारी किया नोटिस
1 साल से बैठकों और साइट से नदारद रहे ARE सौरभ सनोडिया, चलित बिलों की जांच में खुली पोल
टेस्ट व क्यूब रिपोर्ट रजिस्टर मिले अपूर्ण, FE साजिद खान की भूमिका पर भी उठे सवाल, 2 दिन में मांगी कार्रवाई रिपोर्ट
भोपाल, यशभारत। केंद्र सरकार की बहुमूल्य अमृत 2.0 योजना के तहत सिवनी नगर पालिका क्षेत्र में कराए जा रहे जल प्रदाय, पाइपलाइन और जल शोधन संयंत्र (WTP) निर्माण कार्यों में गंभीर अनियमितता और घोर लापरवाही का मामला सामने आया है। परामर्शदाता कंपनी आरवी एसोसिएट जेवी स्तूप (PDMC) के अधिकारियों पर योजना के नियमों को ताक पर रखकर गुणवत्ताहीन कार्य कराने और निकाय को गुमराह करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO), सिवनी ने आरवी-स्तूप जेवी (जबलपुर क्षेत्र) के दल प्रमुख को पत्र जारी कर 2 दिनों के भीतर दोषी अभियंताओं पर कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
बैठक और निर्माण स्थल दोनों से गायब रहे अधिकारी
नगर पालिका द्वारा जारी पत्र के अनुसार, अमृत 2.0 योजना की समीक्षा के लिए पालिका अध्यक्ष, पार्षदों और जिलाधिकारी की मौजूदगी में आयोजित होने वाली साप्ताहिक बैठकों से सहायक आवासीय अभियंता सौरभ सनोडिया बीते 1 वर्ष से अधिक समय से लगातार अनुपस्थित चल रहे हैं। पालिका के सहायक यंत्री और उप-यंत्री द्वारा जब जल शोधन संयंत्र और अन्य निर्माण स्थलों का निरीक्षण किया गया, तब भी ARE सौरभ सनोडिया मौके पर नहीं पाए गए।
चलित बिलों में गड़बड़ी और गुणवत्ता जांच पंजी गायब
निरीक्षण के दौरान खुलासा हुआ कि निर्माण स्थल का पूरा काम क्षेत्र अभियंता (FE) साजिद खान के भरोसे छोड़ा गया था। जांच में साजिद खान के पास निर्माण की गुणवत्ता से जुड़े महत्वपूर्ण क्यूब रिपोर्ट और परीक्षण रिपोर्ट के पंजी (रजिस्टर) तक पूर्ण नहीं मिले। इतना ही नहीं, ठेकेदार को जारी किए गए पिछले चलित बिलों (रनिंग बिल) का परीक्षण करने पर उनमें भी भारी गड़बड़ियां पाई गई हैं।
भविष्य में पेयजल संकट और बदनामी की आशंका
स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि स्थानीय प्रभाव का फायदा उठाकर नियमों के विपरीत कार्य स्वीकृत कराए जा रहे हैं, जिससे भविष्य में शहर के निवासियों को पेयजल आपूर्ति में बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। निविदा की शर्तों का उल्लंघन कर कराए जा रहे इस घटिया निर्माण से जनप्रतिनिधियों और उच्च अधिकारियों में भारी असंतोष व्याप्त है।
नगरीय प्रशासन भोपाल से मांग की जा रही है कि मध्य प्रदेश शासन की छवि धूमिल करने वाली ऐसी परामर्शदाता कंपनियों और दोषी अभियंताओं को तुरंत कार्यमुक्त कर राज्य स्तर पर काली सूची (ब्लैकलिस्ट) में डाला जाए, ताकि शासन की महत्वाकांक्षी योजनाएं गुणवत्ता के साथ पूर्ण हो सकें।








