सेंट्रल जेल में बंदी की मौत पर न्यायिक जांच, पिटाई और रिश्वत के आरोपों से मचा हड़कंप

सेंट्रल जेल में बंदी की मौत पर न्यायिक जांच, पिटाई और रिश्वत के आरोपों से मचा हड़कंप
– 35 वर्षीय नीरज धाकड़ की संदिग्ध मौत का मामला
– परिजनों ने लगाए 10 हजार रुपये मांगने और बेरहमी से मारपीट के आरोप
– जेल प्रबंधन ने बताया बंदियों के बीच विवाद
भोपाल, यशभारत। राजधानी की सेंट्रल जेल में 35 वर्षीय बंदी नीरज धाकड़ की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पुलिस और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मौत के बाद सामने आए चोट के निशानों और परिजनों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के चलते मामला और पेचीदा हो गया है। घटना की वास्तविकता सामने लाने के लिए न्यायिक जांच के आदेश दिए गए हैं। अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि नीरज की मौत पुलिस हिरासत में कथित मारपीट का परिणाम थी, जेल के भीतर बंदियों के बीच हुई हिंसा का या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।
परिजनों का आरोप 10 हजार नहीं दिए तो की मारपीट
रायसेन जिले के देवरी गांव निवासी ठेकेदार नीरज धाकड़ को 7 अगस्त को सूखीसेवनिया थाना पुलिस ने सीमेंट चोरी के मामले में गिरफ्तार किया था। मृतक की पत्नी रानी धाकड़ का आरोप है कि जब वह थाने में पति से मिलने पहुंची तो नीरज ने उसे बताया था कि पुलिसकर्मी उससे पैसों की मांग कर रहे हैं। परिजनों के मुताबिक नीरज ने पेशी के दौरान 10 हजार रुपये लेकर आने की बात भी कही थी।
परिजनों का आरोप है कि रकम नहीं देने के कारण नीरज के साथ थाने में बेरहमी से मारपीट की गई। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ती चली गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और अब न्यायिक जांच में इन दावों की भी पड़ताल की जाएगी।
जेल प्रशासन की कहानी अलग
वहीं, जेल अधीक्षक मानवेंद्र परिहार की ओर से मजिस्ट्रेट को भेजी गई रिपोर्ट में घटना की अलग तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार शनिवार रात नीरज अचानक हिंसक हो गया और जेल में अन्य बंदियों के साथ मारपीट करने लगा। रविवार सुबह घबराहट की शिकायत होने पर उसकी तबीयत बिगड़ती देख उसे तत्काल हमीदिया अस्पताल भेजा गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
जेल प्रशासन के अनुसार मौत का कारण जेल के भीतर बंदियों के बीच हुआ विवाद और उसके बाद बिगड़ी तबीयत से जुड़ा है।
शरीर पर चोट के निशान ने बढ़ाया संदेह
मामले में सबसे अहम सवाल नीरज के शरीर पर मिले चोट के निशानों को लेकर है। सीने, पीठ और कनपटी पर चोट के निशान पाए जाने की बात सामने आई है। यही निशान अब पूरी घटना की जांच का महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं।







