लाखों की किताबें गायब, FIR दर्ज… और सुलग उठा गोदाम: घटना या षड्यंत्र? पाठ्यपुस्तक डिपो फिर विवादों में

रीवा । पाठ्यपुस्तक निगम का डिपो हमेशा से ही विवादों में रहा है। इस बार भी यहां से करीब 40 लाख रुपए की किताबें गायब होने का मामला सामने आया है। यहां के डिपो प्रभारी पहले प्रवेश तिवारी थे। इन्हीं के कार्यकाल में यह किताबें गायब हुईं थी। इसका खुलासा हालांकि अप्रैल में ही हो गया था। प्रवेश तिवारी के पुलिस को भी सूचना दी थी लेकिन तब एक्शन नहीं हुआ। इसके बाद प्रवेश तिवारी को पहले हटाया गया। उन्हें मूल विभाग भेजा गया। इसके बाद प्रभार पाठ्यपुस्तक निगम भोपाल के प्रबंधक चक्रेश जैन को दिया गया। उन्होंने प्रभार सम्हालते ही सबसे पहले चोरहटा थाना पहुंच कर एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस पुस्तकों के चोरी होने के मामले की जांच शुरू करने वाली थी। पुलिस की जांच तो पीछे ही रह गई लेकिन एक नई घटना यहां जरूर हो गई। आधी रात को गोदाम में अचानक से आग लग गई। आग लगते ही हड़कंप मच गया। इसकी जानकारी पाठ्यपुस्तक निगम के प्रभारी अधिकारी को दी गई। पुलिस और प्रशासन को भी सूचना दी गई। रात में ही टीम मौके पर पहुंची। आग पूरे गोदाम को अपनी चपेट में नहीं ले पाई थी। आग के फैलने से पहले ही उस पर काबू पा लिया गया। हालांकि इस आग ने कई तरह के संदेह खड़े कर दिए हैं। अब तक गोदाम में आग नहीं लगी थी। जब प्रबंधक ने चोरहटा थाना में एफआईआर कराई। उसके बाद ही क्यों आग लगी। यह सारी घटनाएं किसी बड़ी मिली भगत और सुनियोजित कांड की तरफ इशारा कर रही हैं। हालांकि अब जांच पुलिस को करना है। जांच में ही सारे तथ्य सामने आएंगे।
जानकारी के अनुसार गोदाम में लगी आग को फिलहाल शार्ट सर्किट के कारण लगना बताया जा रहा है। आगजनी के कारण 25 बंडल ही प्रभावित हुए हैं। कुछ की बोरियां जली तो कई किताबें आंशिक रूप से प्रभावित हुई हैं। आग पर समय रहते काबू पा लिया गया, वर्ना कई करोड़ रुपए की किताबें जलकर राख हो जाती
आयुक्त लोक शिक्षण ने किताब चोरी मामले में डिपो प्रभारी रहे प्रवेश तिवारी को निलंबित कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि मप्र पाठ्यपुस्तक निगम के संभागीय भंडार रीवा में डिपो प्रबंधक रीवा से 18 जून 2026 और 3 जुलाई 2026 के अनुसार प्रवेश तिवारी डिपो प्रबंधक मूल पद उच्च माध्यमिक शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर रीवा में पदस्थ रहे। इसकी पदस्थापना के दौरान ही करीब 495 बंडल पुस्तकों की चोरी , स्टॉक अनियमितता का गंभीर प्रकरण संज्ञान में आया। इसके बद प्रारंभिक कार्रवाई की गई। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए निगम मुख्यालय से जांच दल गठित कर प्रकरण की विस्तृत जांच भी कराई गई। जांच में पाया गया कि 40 लाख 63 हजार 426 रुपए की करीब 495 बंडल सामान्य विक्रय की किताबें कम पाई गई हैं। इस लापरवाही के कारण प्रवेश तिवारी को निलंबित कर दिया गया है।
पाठ्य पुस्तक निगम इस पूरे पुस्तक चोरी का ठीकरा प्रवेश तिवार पर ही मडऩे की सोच रहे हैं। जबकि प्रवेश तिवारी ने किताबों की चवोरी की शिकायत चोरहटा थाना में पहली बार 15 अप्रैल 2026 को ही दे दी थी। पुलिस अधीक्षक कार्यालय को भी इस संबंध में सूचित किया गया था। इतना ही नहीं कमेटी गठित कर चोरी गई किताबों की जांच कराई गई थी। जांच प्रतिवेदन भी चोरहटा थाना प्रभारी पवन शुक्ला को सौंपा गया था। हालांकि तब पुलिस ने किसी तरह का एक्शन नहीं लिया था। प्रवेश तिवारी का कहना है कि पिछले चार सालों से वह डिपो में पदस्थ रहे। वहां कई पद खाली पड़े हुए हैं। कई मर्तबा पाठ्य पुस्तक निगम के प्रबंध संचालक को पत्र लिखकर रिग्युलर कर्मचारियों की पदस्थापना की बात कही गई थी। इसे बाद भी उनकी नहीं सुनी गई थी। प्रवेश तिवारी ने प्रबंधक को पत्र लिखकर मूल विभाग में वापस भेजने के लिए पत्र लिखा था। इसके बाद ही उन्हें वापस भेजा गया
रीवा डिपो से रीवा और शहडोल संभाग के 9 जिलों को किताबें सप्लाई की जाती थी। अब जरा अंदाजा लगाइए कि यहां से कितनी किताबों की सप्लाई होती होगी। सरकारी के साथ प्राइवेट दुकानों केा भी यहीं से किताबें बेची जाती है। यानि रीवा का डिपो करोड़ों का सौदा करता है। अब इसमें से यदि दो तीन गाडिय़ां किताबें पार कर दी जाएं तो कहां किसी को पता चलना है। सरकारी स्कूलों में हर साल किताबें कम ही पहुंचती है। बच्चों को पूरी किताबें मिलती नहीं। सरकारी शिक्षक और अधिकारी कार्रवाई के डर से फर्जी डाटा आनलाइन दर्ज कर देते हैं। इसी का फायदा डिपो के कर्मचारी और कारोबारी उठाते हैं। इस पूरे कांड में बड़े लोगों के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। इसमें सफेदपोशों के अलावा व्यापारी और डिपो के कर्मचारी, अधिकारी भी संलिप्त हो सकते हैं।







