कमर्शियल लाइसेंस फीस पर व्यापारियों का मोर्चा, भोपाल नगर निगम से शुल्क हटाने की मांग प्रदेश में एक समान व्यवस्था नहीं तो भोपाल के कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ क्यों?

कमर्शियल लाइसेंस फीस पर व्यापारियों का मोर्चा, भोपाल नगर निगम से शुल्क हटाने की मांग
प्रदेश में एक समान व्यवस्था नहीं तो भोपाल के कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ क्यों?
भोपाल यश भारत। कमर्शियल लाइसेंस फीस को लेकर राजधानी के व्यापारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने नगर निगम क्षेत्र में लागू इस शुल्क को समाप्त करने की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। चेंबर का कहना है कि प्रदेश के अन्य शहरों में यह शुल्क लागू नहीं होने के बावजूद भोपाल के व्यापारियों से इसकी वसूली की जा रही है। चेंबर पदाधिकारियों के मुताबिक कमर्शियल लाइसेंस फीस 21 अप्रैल 2023 से भोपाल में लागू की गई थी। वर्ष 2025 में राज्य सरकार की ओर से इस व्यवस्था में बदलाव और राहत की कार्रवाई की गई लेकिन भोपाल नगर निगम में शुल्क वसूली अभी भी जारी है। व्यापारियों का सवाल है कि जब अन्य नगर निकायों में यह शुल्क लागू नहीं है तो भोपाल को अलग व्यवस्था के दायरे में क्यों रखा गया है।
400 से 50 हजार तक शुल्क
व्यापारियों के अनुसार कमर्शियल लाइसेंस फीस करीब 400 रुपये से शुरू होकर कारोबार की श्रेणी और प्रकृति के आधार पर 50 हजार रुपये तक पहुंचती है। चेंबर का कहना है कि इससे छोटे दुकानदारों से लेकर मध्यम और बड़े कारोबारियों तक पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है। व्यापारियों का विरोध किसी एक कारोबारी वर्ग तक सीमित नहीं है।
महापौर और अधिकारियों से मिल चुके व्यापारी
चेंबर प्रतिनिधियों ने बताया कि शुल्क समाप्त करने को लेकर महापौर मंत्री और नगर निगम अधिकारियों सहित विभिन्न स्तरों पर चर्चा की जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ। चेंबर का आरोप है कि परिषद की बैठक में मुद्दा रखने का आश्वासन मिलने के बावजूद इसे एजेंडे में शामिल नहीं किया गया।
परिषद की बैठक में प्रस्ताव की मांग
चेंबर पदाधिकारीयों ने महापौर नगर निगम अध्यक्ष और सभी पार्षदों से आगामी परिषद बैठक में कमर्शियल लाइसेंस फीस समाप्त करने का प्रस्ताव लाने की मांग की है। संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो व्यापारियों के साथ बैठक कर आगे की आंदोलनात्मक रणनीति तय की जाएगी। चेंबर ने भोपाल में भी प्रदेश के अन्य नगर निकायों के समान व्यवस्था लागू करने की मांग दोहराई है।







