देशमध्य प्रदेश

जटाओं की रहस्यमयी गुफा में विराजे भोलेनाथ,पचमढ़ी उमड़ रही आस्था की भीड़

गुप्त गंगा और 108 शिवलिंगों ने श्रद्धालुओं को किया आकर्षित

पचमढ़ी यश भारत। सतपुड़ा की वादियों में बसे पचमढ़ी के प्रसिद्ध जटाशंकर मंदिर में इन दिनों श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। भगवान शिव को समर्पित यह प्राचीन और रहस्यमयी गुफा मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ अपनी प्राकृतिक संरचनाओं और पौराणिक मान्यताओं के कारण देशभर में विशेष पहचान रखता है। यश भारत की विशेष कवरेज में जटाशंकर मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं, प्राकृतिक रहस्यों और पर्यटन से जुड़े पहलुओं को करीब से जाना गया।

भस्मासुर से बचने शिव ने लिया था गुफा का सहारा

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जब राक्षस भस्मासुर ने भगवान शिव से वरदान प्राप्त कर उन्हीं को भस्म करने का प्रयास किया, तब भगवान शिव इस गहरी गुफा में आकर छिपे थे। कहा जाता है कि गुफा की विशाल चट्टानों में उनकी जटाओं के अंश उलझ गए थे। इन्हीं चट्टानों की बनावट आज भी शिव की जटाओं जैसी दिखाई देती है, जिसके कारण इस स्थान का नाम जटाशंकर पड़ा।

गुफा के भीतर मौजूद हैं 108 प्राकृतिक शिवलिंग

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जटाशंकर गुफा के भीतर प्राकृतिक रूप से निर्मित शिवलिंग श्रद्धालुओं की आस्था का मुख्य केंद्र हैं। गुफा में छोटे-बड़े करीब 108 प्राकृतिक शिवलिंग मौजूद बताए जाते हैं। गुफा की छत पर बनी चट्टानों की आकृति शेषनाग के फन जैसी दिखाई देती है, जिसे देखने दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं।

आज तक नहीं मिला ‘गुप्त गंगा’ का स्रोत

गुफा के भीतर बहने वाली ठंडी जलधारा को ‘गुप्त गंगा’ कहा जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस जलधारा का स्रोत आज तक कोई खोज नहीं पाया है। यही वजह है कि यह स्थान धार्मिक रहस्य और आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है। कई श्रद्धालु इस जल को पवित्र मानकर अपने साथ भी ले जाते हैं।

150 सीढ़ियां उतरकर पहुंचते हैं श्रद्धालु

जटाशंकर मंदिर पचमढ़ी बस स्टैंड से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मुख्य सड़क से नीचे उतरकर श्रद्धालुओं को करीब 150 सीढ़ियां पार करनी पड़ती हैं। गुफा के भीतर का रास्ता पत्थरों और पानी की वजह से फिसलन भरा रहता है, जिसके चलते पर्यटक सावधानी के साथ दर्शन करते नजर आए।

महाशिवरात्रि पर लगता है विशाल मेला

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मंदिर में हर साल महाशिवरात्रि के अवसर पर विशाल मेले का आयोजन होता है। हजारों की संख्या में भक्त यहां पहुंचकर भगवान शिव के दर्शन करते हैं। स्थानीय व्यापारियों और आदिवासी समुदाय के लिए भी यह समय विशेष महत्व रखता है। मंदिर मार्ग पर जड़ी-बूटियां, शिलाजीत और पारंपरिक आयुर्वेदिक उत्पाद बेचते स्थानीय लोग भी पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करते दिखाई दिए।

प्राकृतिक सुंदरता और आस्था का अद्भुत संगम

घने जंगल, ऊंची चट्टानें, ठंडी हवा और गुफा के भीतर बहता पानी जटाशंकर मंदिर को पचमढ़ी के सबसे खास धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल करता है। श्रद्धालुओं के साथ बड़ी संख्या में युवा और प्रकृति प्रेमी भी यहां पहुंच रहे हैं। यश भारत की विशेष कवरेज में यह साफ नजर आया कि जटाशंकर मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि प्रकृति और रहस्य का अनोखा संगम भी है।

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