आखिर “अनुशासन” का पाठ पढ़ाने वाला संस्थान अपनी ही पार्किंग व्यवस्था कब सुधारेगा?… क्राइस्ट चर्च स्कूल से हाईकोर्ट ने ट्रैफिक जाम पर मांगा जवाब

जबलपुर। शहर के वीआईपी स्कूलों में शामिल क्राइस्ट चर्च स्कूल के बाहर लगने वाले रोजाना के ट्रैफिक जाम को लेकर आखिरकार मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया। सड़क पर घंटों जाम और आम लोगों की परेशानी के बीच अब अदालत ने स्कूल प्रबंधन से ही पूछा है कि आखिर “अनुशासन” का पाठ पढ़ाने वाला संस्थान अपनी ही पार्किंग व्यवस्था कब सुधारेगा।
नगर निगम द्वारा जारी नोटिस को चुनौती देते हुए स्कूल प्रबंधन हाईकोर्ट पहुंचा था। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस दीपक कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने स्कूल प्रबंधन को 15 दिनों के भीतर ठोस प्रस्ताव देने के निर्देश दिए हैं कि स्कूल खुलने और छुट्टी के समय सड़क पर लगने वाले जाम से लोगों को राहत कैसे मिलेगी।
बताया गया कि नगर निगम ने 15 जनवरी 2015 को नोटिस जारी कर स्कूल के बाहर अव्यवस्थित पार्किंग और ट्रैफिक दबाव को लेकर आपत्ति जताई थी। निगम का कहना था कि छुट्टी के समय अभिभावकों के वाहन सड़क पर इस तरह खड़े हो जाते हैं मानो सड़क नहीं, निजी पार्किंग परिसर हो। इससे आम राहगीरों और अन्य वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सुनवाई के दौरान स्कूल प्रबंधन की ओर से अधिवक्ता आकाश चौबे ने पक्ष रखा, जबकि राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता यामिनी झुबकानी और नगर निगम की ओर से अधिवक्ता सौरभ सुंदर उपस्थित हुए।
हाईकोर्ट ने फिलहाल स्कूल प्रबंधन को राहत देते हुए कहा है कि निगम के पुराने नोटिस के आधार पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया कि नियम सबके लिए बराबर हैं। अदालत ने संकेत दिए कि यदि भविष्य में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए गए तो कार्रवाई का रास्ता खुला रहेगा।
शहरवासियों के बीच भी चर्चा है कि बच्चों को “सिविक सेंस” सिखाने वाले बड़े संस्थानों के बाहर यदि रोज सड़कें जाम रहें, तो फिर सीख आखिर कौन किससे रहा है।







