भोपालमध्य प्रदेश

नीट पेपर लीक के तार अब भोपाल से जुड़े: सत्य साईं यूनिवर्सिटी का छात्र नासिक से गिरफ्तार

नीट पेपर लीक के तार अब भोपाल से जुड़े: सत्य साईं यूनिवर्सिटी का छात्र नासिक से गिरफ्तार

भोपाल, यशभारत। देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी-2026 में हुई धांधली की आंच अब मध्य प्रदेश तक पहुंच गई है। राजस्थान पुलिस की विशेष टीम ने महाराष्ट्र के नासिक से शुभम खैरनार को गिरफ्तार किया है, जो भोपाल के पास सीहोर स्थित सत्य साईं यूनिवर्सिटी का BAMS तृतीय वर्ष का छात्र है। इस गिरफ्तारी के बाद सीहोर कोतवाली पुलिस ने यूनिवर्सिटी कैंपस पहुंचकर छात्र से जुड़े अहम दस्तावेज जब्त किए हैं।

10 लाख में खरीदा, 15 लाख में बेचा
जांच में खुलासा हुआ है कि शुभम खैरनार ने नीट का पेपर 10 लाख रुपये में खरीदा था। मुनाफे के लालच में उसने इस पेपर को गुरुग्राम के यश यादव नामक युवक को 15 लाख रुपये में बेच दिया। राजस्थान एसओजी की जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क बेहद शातिर तरीके से काम कर रहा था।

हूबहू मिले सवाल और क्रम
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि जो ‘गेस पेपर’ छात्रों को दिया गया था, उसके सवाल न केवल असली पेपर से मिलते-जुलते थे, बल्कि उनका क्रम भी बिल्कुल एक जैसा था। एजेंसियों का दावा है कि 720 नंबर के पेपर में से लगभग 600 नंबर के सवाल परीक्षा से पहले ही लीक हो चुके थे।

30 हजार तक गिर गई थी पेपर की कीमत
सूत्रों के अनुसार, शुरुआती दौर में यह पेपर 5 लाख रुपये तक में बेचा जा रहा था। जैसे-जैसे परीक्षा की घड़ी नजदीक आई, दलालों ने इसे कम दामों पर बेचना शुरू किया। परीक्षा की एक रात पहले तक यह पेपर मात्र 30-30 हजार रुपये में व्हाट्सएप के जरिए कई छात्रों तक पहुंचा दिया गया था। कई मोबाइल फोन की जांच में Forwarded Many Times टैग वाले दस्तावेज मिले हैं।

यूनिवर्सिटी प्रशासन का पक्ष
सत्य साईं यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर मुकेश तिवारी ने पुष्टि की है कि शुभम खैरनार ने साल 2021 में एडमिशन लिया था। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि वह लंबे समय से पढ़ाई के लिए यूनिवर्सिटी नहीं आ रहा था। पुलिस ने छात्र के शैक्षणिक रिकॉर्ड और पते से संबंधित सभी जरूरी कागजात अपने कब्जे में ले लिए हैं।

22 लाख छात्रों को लगा झटका, अब CBI के हाथ में जांच
पेपर लीक की पुष्टि होने के बाद NTA ने नीट यूजी-2026 परीक्षा को रद्द कर दिया है। इस फैसले से देश के करीब 22 लाख उम्मीदवारों का भविष्य दांव पर लग गया है। केंद्र सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरी जांच CBI को सौंप दी है। फिलहाल जयपुर से गिरफ्तार मास्टरमाइंड मनीष यादव और अविनाश लांबा से पूछताछ जारी है, जिससे कई अन्य राज्यों में फैले नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है।

 

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