गिरा भू-जलस्तर, कई गांवों में बिगड़े हालात, स्लीमनाबाद में अंडर ग्राउण्ड नहर की वजह से नीचे चला गया वाटर लेबल, शहर में भी कई वार्डों में पीने के पानी के लिए जूझ रहे वाशिंदे, बिगड़े हैण्डपंपों को सुधारने पहल नहीं

कटनी, यशभारत। शहर से लेकर गांव तक इस समय पीने के पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई है। गर्मी शुरू होते ही शहर से लगे कुछ इलाकों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट ने दस्तक दे दी थी, इसके बाद भी इससे निपटने के लिए प्रशासन ने कोई कार्ययोलना नहीं बनाई। एक तरफ राज्य सरकार जल गंगा संवर्धन अभियान चला रही है तो वहीं दूसरी तरफ कटनी जिले में एक बड़ी आबादी पीने के लिए पानी के लिए तरस रही है। शहर की बात करें तो जिन वार्डों में नगर निगम कटाएघाट फिल्टर प्लांट से जलापूर्ति की जाती है, उनको छोडक़र बाकी वार्डों में पानी का संकट विकराल रूप धारण कर रहा है। कुछ ऐसे ही हालात ग्रामीण क्षेत्रों के भी हैं। खासकर पठार क्षेत्र बहोरीबंद, रीठी और स्लीमनाबाद पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। स्लीमनाबाद, तेवरी और उमरियापान में भू-जलस्तर काफी नीचे चला गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि स्लीमनाबाद में वाटर लेबल नीचे जाने का मुख्य कारण अंडर ग्राउण्ड नहर को बताया जा रहा है। स्थानीय ग्रामवासियों का कहना है कि स्लीमनाबाद में जब से अंडर ग्राउण्ड नहर का काम शुरू हुआ है, तभी से वाटर लेबल काफी नीेचे चला गया है और बोरिंग में पानी नहीं आ रहा है। लोगों ने यह भी बताया कि यहां करीब 50 से 60 प्रतिशत तक भू-जलस्तर में गिरावट आई है। इसके बाद भी स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। लोगों का कहना है कि जिन घरों में बोरिंग है, वहां करीब 30 से 40 फुट नीचे पानी चला गया है। यह ऐसे इलाके हैं, जहां पानी की ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं बनी। लोगों ने यह भी बताया कि अंडर ग्राउण्ड नहर की वजह से पूरे इलाके का वाटर लेबल डिस्टर्ब हो गया है। जिसकी वजह से एक बड़ी आबादी को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
हरदुआ और घुघरी में शो-पीस बनी पानी की टंकी
स्लीमनाबाद ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम हरदुआ और ग्राम घुघरी में पानी को लेकर हालात खराब होते जा रहे हैं। करीब एक करोड़ रूपए की लागत से ग्राम हरदुआ में जल-जल योजना के तहत पानी की टंकी बनाई गई थी। इस पानी की टंकी से कुछ दिनों तक गांव में पेयजल आपूर्ति की गई लेकिन जैसे ही गर्मी ने दस्तक दी, वैसे ही ग्रामीणों की परेशानियां बढ़ गईं। गांव के निवासी मदन सिंह, हीरालाल साहू, गेन्दलाल आदिवासी, श्यामलाल कोल, विष्णु आदिवासी, कोमल साहू आदि ने बताया कि पेयजल आपूर्ति के लिए पानी की टंकी का सही तरीके से रखरखाव नहीं किया जा रहा है। जिसके चलते टंकी से पानी की नियमित रूप से सप्लाई नहीं हो पा रही है। मजबूरन ग्रामीणों को या तो काफी दूर से पानी लाना पड़ रहा है या फिर हैण्डपंपों के भरोसे अपनी प्यास बुझानी पड़ रही है। ग्राम पंचायत के कर्ताधर्ताओं को इस समस्या से अवगत कराने के बाद भी कोई प्रयास नहीं हुए,जिसका खामियाजा ग्राम हरदुआ के लोगों को उठाना पड़ रहा है। कुछ इसी तरह के हालात ग्राम घुघरी के भी है। यहां भी पानी की टंकी होने के बाद भी कई-कई दिनों तक पानी की सप्लाई नहीं हो रही है।
गहरी निद्रा में पीएचई विभाग
मई की शुरुआत के साथ ही जिले में भूमिगत जलस्तर तेजी से नीचे चले जाने की शिकायतें कई गांवों से मिली हैं लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इन हालातों से निपटने के लिए कोई प्रयास नहीं हुए। जिले के कई हिस्सों में जलस्तर तेजी से नीचे जा चुका है। कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में तो भूमिगत जलस्त्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जिस पीएचई विभाग को हर महीने भूमिगत जलस्तर की रिपोर्ट तैयार करनी चाहिए, वह गहरी निद्रा में है।
बोर खनन पर प्रशासन मौन
जलसंकट गहराने के बीच सबसे अधिक फायदा बोर खनन कारोबार से जुड़े लोग उठा रहे हैं। शहर से लेकर गांव तक धड़ल्ले से नए बोर कराए जा रहे हैं, जबकि प्रशासन ने बोर खनन पर प्रतिबंध लगाया है, इसके बावजूद खुलेआम बोर खनन जारी है।







