भोपालमध्य प्रदेश

NCRB रिपोर्ट: MP में कानून-व्यवस्था पर सवाल, ST अत्याचार में प्रदेश देश में नंबर-1

NCRB रिपोर्ट: MP में कानून-व्यवस्था पर सवाल, ST अत्याचार में प्रदेश देश में नंबर-1

– हर 3 घंटे में एक दुष्कर्म, रोजाना औसतन 32 अपहरण; महिला अपराध में मध्य प्रदेश पांचवें स्थान पर बरकरार

भोपाल, यशभारत। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ की रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश में सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश अनुसूचित जनजाति के खिलाफ होने वाले अपराधों में पूरे देश में पहले पायदान पर है। राज्य में आदिवासियों और दलितों के साथ-साथ महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध के ग्राफ ने चिंता बढ़ा दी है।
आदिवासियों पर सबसे ज्यादा जुल्म
रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजाति वर्ग के खिलाफ हिंसा और अत्याचार के सबसे अधिक 3,165 मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं, अनुसूचित जाति के खिलाफ अपराध के 7,765 मामलों के साथ प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। ये आंकड़े बताते हैं कि हाशिए पर खड़े वर्गों के लिए राज्य में सुरक्षा व्यवस्था अब भी एक बड़ी चुनौती है।
महिलाएं असुरक्षित: हर 3 घंटे में एक रेप
महिला सुरक्षा के मामले में प्रदेश की स्थिति भयावह बनी हुई है। आंकड़ों का विश्लेषण करें तो मध्य प्रदेश में हर 3 घंटे में बलात्कार का एक मामला दर्ज हो रहा है। महिला अपराधों की कुल सूची में एमपी लगातार चौथे साल पांचवें स्थान पर रहा है। साल 2024 में महिलाओं के खिलाफ कुल 32,832 मामले दर्ज हुए, यानी रोजाना औसतन 90 से ज्यादा महिलाएं अपराध का शिकार हुईं।
बच्चों के खिलाफ अपराध: पहले से तीसरे स्थान पर पहुंचे
एक राहत वाली खबर यह है कि बच्चों के खिलाफ अपराध के मामले में मध्य प्रदेश पिछले साल के पहले स्थान से खिसक कर अब तीसरे स्थान पर आ गया है। हालांकि, संख्या अब भी डरावनी है; साल भर में बच्चों के खिलाफ 21,908 मामले दर्ज किए गए। POCSO एक्ट के तहत 3,721 मामलों के साथ एमपी देश में चौथे नंबर पर है।
अपहरण और हत्या के आंकड़े
अपहरण: प्रदेश में अपहरण की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। हर दिन करीब 32 अपहरण हो रहे हैं, जिसके साथ एमपी देश में चौथे स्थान पर है।
हत्या: हत्या के मामलों में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। 2022 में जहां 1,978 हत्याएं हुई थीं, वहीं 2024 में यह आंकड़ा गिरकर 1,813 रह गया है।
दहेज हत्या: दहेज के लिए जान गंवाने वाली बेटियों के मामले में एमपी देश में तीसरे नंबर पर है। साल भर में 450 दहेज हत्याएं दर्ज की गईं।
देरी से आई रिपोर्ट
NCRB ने यह रिपोर्ट 6 मई 2026 को जारी की है। नियमानुसार इसे सितंबर 2025 में आ जाना चाहिए था, लेकिन डेटा सत्यापन और मिलान के चलते इसमें देरी हुई। रिपोर्ट में आईपीसी के साथ-साथ नई न्याय संहिता की धाराओं के तहत दर्ज मामलों को भी शामिल किया गया है।

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