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113 साल की शान ‘पंजाब मेल’ पमरे की पटरियों पर है दहाड़ती*

The 113-Year-Old Pride, the ‘Punjab Mail’, Roars Across WCR Tracks.

*113 साल की शान ‘पंजाब मेल’ पमरे की पटरियों पर है दहाड़ती*

1 जून 1912 को अपनी पहली सेवा शुरू की थी*

*मुम्बई से फिरोजपुर तक 33 घंटे में नापती 1900 किमी का सफर*

जबलपुर यशभारत।भारतीय रेल की गौरवशाली विरासत ‘पंजाब मेल’ आज भी अपनी ऐतिहासिक पहचान और दमदार रफ्तार के साथ पटरियों पर सरपट दौड़ रही है। 113 साल पुरानी यह प्रतिष्ठित ट्रेन पमरे से गुजरते हुए मुंबई से फिरोजपुर तक करीब 1900 किलोमीटर की दूरी महज 33 घंटे में तय कर यात्रियों के भरोसे और रेलवे की परंपरा को मजबूती से आगे बढ़ा रही है।

उक्त ट्रेन 1 जून 1912 को अपनी पहली सेवा शुरू की थी।जो अपने समय की सबसे तेज ट्रेन थी।आज यह ट्रेन 12137/12138 नंबर के साथ महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से फिरोजपुर कैंट (पंजाब) के बीच चलती है। अब यह आधुनिक एचएचबी कोच के साथ चलती है, जो यात्रियों को बेहतर सुरक्षा और आराम प्रदान करते हैं।

*ऐतिहासिक महत्व:*

1912 में अपनी शुरुआत के बाद से पंजाब मेल ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। जानकारी के मुताबिक यह गाड़ी पूर्व में सिर्फ पहले दर्जे की ट्रेन थी।

बाद में इसमें भारतीय यात्रियों के लिए तीसरी श्रेणी की बोगियां जोड़ी गईं।

*मुंबई से फिरोजपुर तक दौड़ती है*

भारतीय रेल की विरासत का प्रतीक मानी जाने वाली पंजाब मेल आज भी पूरे गौरव के साथ पटरियों पर दौड़ रही है।यह ट्रेन देश की सबसे पुरानी नियमित रेल सेवाओं में शामिल है। करीब 113 वर्षों का लंबा इतिहास समेटे यह गाड़ी वर्तमान में मुंबई से पंजाब तक हजारों यात्रियों को जोड़ती है।

*इन राज्यों से गुजरती है*

यह ऐतिहासिक ट्रेन महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से रवाना होकर मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा होते हुए पंजाब के फिरोजपुर तक पहुंचती है। लगभग 1,900 किलोमीटर से अधिक का सफर तय करने वाली यह ट्रेन औसतन 32 से 34 घंटे में अपनी यात्रा पूरी करती है, जो मार्ग और परिचालन परिस्थितियों पर निर्भर करता है।पंजाब मेल मुम्बई से चलकर खंडवा इटारसी के रास्ते पश्चिम मध्य रेल के भोपाल रेल मंडल से गुजरते हुए विभिन्न स्टेशनों से होते हुए फिरोजपुर पहुंचती है।

*उत्तर व मध्य भारत को सीधा जोड़ने वाली मजबूत कड़ी*

इटारसी जंक्शन पर इसका ठहराव विशेष रूप से अहम माना जाता है, क्योंकि यह प्रमुख रेल जंक्शनों में से एक है।यह ट्रेन उत्तर और मध्य भारत को सीधा जोड़ने वाली मजबूत कड़ी बनती है। उक्त ट्रेन समय के साथ आम जनता की जीवनरेखा बन गई। तकनीकी बदलाव, कोचों का आधुनिकीकरण और सुरक्षा मानकों में सुधार के बावजूद पंजाब मेल की ऐतिहासिक पहचान कायम है।पश्चिम मध्य रेल से गुजरने वाली यह‘सबसे बूढ़ी’ गाड़ी आज भी समय की कसौटी पर खरी उतरते हुए यात्रियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा का भरोसा दे रही है।

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