प्रदेश की राजधानी भोपाल के भेल दशहरा मैदान में टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट से मुक्ति और पेंशन बहाली की मांग पर भोपाल में शिक्षकों का महाप्रदर्शन

प्रदेश की राजधानी भोपाल के भेल दशहरा मैदान में टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट से मुक्ति और पेंशन बहाली की मांग पर भोपाल में शिक्षकों का महाप्रदर्शन
प्रथम नियुक्ति से सेवा गणना, पुरानी पेंशन और नियमितीकरण सहित कई मांगें उठीं , सरकार को दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
भोपाल यश भारत। राजधानी भोपाल के भेल दशहरा मैदान में शनिवार को अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा, मध्यप्रदेश के बैनर तले हजारों शिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर विशाल धरना प्रदर्शन किया। आंदोलन का केंद्र बिंदु शिक्षक पात्रता परीक्षा टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट से मुक्ति, सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति से करने और पेंशन लाभ बहाल करने की मांग रही। प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे अध्यापक एवं शिक्षक संवर्ग के कर्मचारियों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर जोरदार आवाज बुलंद की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों को बार बार टी ई टी जैसी परीक्षा से गुजरना पड़ना न केवल अव्यवहारिक है बल्कि उनके अनुभव और कार्यक्षमता पर भी सवाल खड़ा करता है। इसलिए कार्यरत शिक्षकों को इस परीक्षा से पूर्णत मुक्त किया जाना चाहिए। सेवा गणना और पेंशन का मुद्दा प्रमुख , मोर्चा के पदाधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में सेवा अवधि की गणना पहली नियुक्ति से न होकर बाद की प्रक्रियाओं के आधार पर की जा रही है जिससे हजारों शिक्षकों को पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि सेवा गणना प्रारंभिक नियुक्ति तिथि से सुनिश्चित की जाए ताकि सभी शिक्षकों को समान रूप से पेंशन और अन्य लाभ मिल सकें। प्रदर्शन के दौरान मोर्चा ने सरकार के समक्ष अपनी मांगों का विस्तृत ज्ञापन भी प्रस्तुत किया। कार्यरत शिक्षकों को टी ई टी से पूर्णत मुक्त किया जाए । सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति तिथि से की जाए पुरानी पेंशन योजना ओ पी एस लागू कर पेंशन लाभ सुनिश्चित किया जाए । संविदा एवं अतिथि शिक्षकों का नियमितीकरण किया जाए वेतन विसंगतियों को दूर कर समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाए । पदोन्नति की प्रक्रिया को सरल और समय बद्ध बनाया जाए , आंदोलन तेज करने की चेतावनी , धरने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि प्रदेश के हजारों शिक्षक लंबे समय से इन समस्याओं से जूझ रहे हैं लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। यदि सरकार जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा जिसमें प्रदेशव्यापी प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं। मोर्चा का कहना है कि यह सिर्फ मांगों का मुद्दा नहीं बल्कि शिक्षकों के सम्मान और भविष्य से जुड़ा प्रश्न है। ऐसे में सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए शीघ्र निर्णय लेना चाहिए ताकि शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो और शिक्षकों में असंतोष खत्म किया जा सके।







