93 लाख के फर्जी बिल घोटाले की जांच तेज, 10 करोड़ तक पहुंच सकता है खेल
सीएमएचओ के निलंबन के बाद खुलने लगी परतें,फाइलों से दस्तावेज गायब; अन्य भुगतानों की भी होगी जांच

जबलपुर, यशभारत। विक्टोरिया अस्पताल स्थित सीएमएचओ कार्यालय में 93 लाख 4 हजार 998 रुपये के फर्जी बिल घोटाले के सामने आने के बाद अब जांच की आंच और तेज हो गई है। भोपाल की निजी फर्म सिंह एंटरप्राइजेज को 12 फर्जी बिलों के माध्यम से किए गए भुगतान के मामले में प्रारंभिक जांच में जिस सामग्री के नाम पर भुगतान किया गया, वह मौके पर कहीं उपलब्ध नहीं मिली। सूत्रों के अनुसार अब जांच टीम की नजर पिछले कई वर्षों में हुए अन्य भुगतानों और खरीद प्रक्रियाओं पर भी है। आशंका जताई जा रही है कि यह घोटाला केवल 93 लाख तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी राशि 10 करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंच सकती है। फाइलों से महत्वपूर्ण दस्तावेजों के गायब मिलने से संदेह और गहरा गया है।
फर्जी बिलों से हुआ भुगतान
जांच में सामने आया कि स्वास्थ्य सामग्री, साइनेज और अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीद के नाम पर भोपाल की निजी फर्म को भुगतान किया गया, जबकि संबंधित सामग्री न तो कार्यालय में मिली और न ही स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंची। इससे स्पष्ट है कि सरकारी राशि का भुगतान केवल कागजों में दर्शाई गई सप्लाई के आधार पर किया गया। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि भुगतान की स्वीकृति किन स्तरों पर दी गई और इसमें किन अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका रही।
पुरानी फाइलों की जांच
कलेक्टर के निर्देश पर गठित जांच दल अब पुराने भुगतान रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और खरीद से जुड़ी फाइलों को खंगाल रहा है। दस्तावेजों के गायब होने से यह आशंका और प्रबल हो गई है कि घोटाला लंबे समय से चल रहा था। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि कहीं अन्य फर्मों के नाम पर भी इसी तरह फर्जी भुगतान तो नहीं किए गए।







