जबलपुरमध्य प्रदेश

2.27 करोड़ की ठगीः रिमांड में ठगों ने नए नाम के साथ उगले राज

टेलीग्राम के जरिए फैलाया ठगी का नेटवर्क, विदेश तक जुड़े तार

जबलपुर, यशभारत। शेयर बाजार में निवेश पर 500 प्रतिशत मुनाफे का लालच देकर शहर की एक महिला से 2 करोड़ 27 लाख रुपये की ठगी करने के मामले में तीन आरोपियों को पुलिस रिमांड में लेकर सघन पूछताछ कर रही है। जिसमें ठगी नेटवर्क से जुड़े आरोपियों ने नए राज उगले है। इसके साथ नए नाम भी पुलिस को बताये है जो दिल्ली-मुंबई निवासी है। जिसकी तफ्तीश चल रही है यहां भी टीमें दबिश देने की तैयारी में है। अब तक की जांच में यह बात भी सामने आई है कि ठगी का मकडज़ाल सोशल मीडिया के टेलीग्राम के जरिए फैलाया गया था और इसके तार विदेश तक जुड़े हुए है।

आरोपियों ने बताया कि वे फर्जी कंपनियां बनाकर उनके नाम से करेंट अकाउंट खुलवाते थे। इन्हीं खातों का उपयोग साइबर फ्रॉड की रकम को इधर-उधर करते थे। पूछताछ में आरोपियों द्वारा और भी राज उगलने की संभावना है। आज रिमांड खत्म होने पर तीनों को पुनः न्यायालय पेश किया जायेगा। विदित हो कि साइबर ठगों ने शहर में महिला को अपने जाल में फंसाने के लिए लुभावने वादे किए थे।

आरोपियों ने दावा किया था कि शेयर बाजार में निवेश करने पर प्रतिदिन 5 का रिटर्न और दीर्घकालिक निवेश पर 500 प्रतिशत तक का मुनाफ मिलेगा। इसके साथ ही, शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के बहाने और सस्ते दर पर बल्क ट्रेडिंग में शेयर दिलाने का झांसा देकर महिला से किश्तों में कुल 2.27 करोड़ रुपये ऐंठ लिए गए। धोखाधड़ी का अहसास होने पर पीड़िता ने क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर क्राइम ब्रांच ने प्रकरण दर्ज किया था। मामले की कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए पुलिस ने नागपुर केंद्रीय कारागार में बंद एक अन्य आरोपी अभिषेक विश्वकर्मा पिता भवानी प्रसाद विश्वकर्मा को अभिरक्षा में लेकर प्रोडक्शन वारंट में शहर लाया है। पूर्व में पकड़े गए आरोपी रोहित भगोरिया और तरुण ने अभिषेक की संलिप्तता की जानकारी दी थी।

अभिषेक एक आदतन साइबर अपराधी है, जो पहले से ही मुंबई वर्ली साइबर पुलिस स्टेशन और नागपुर राणा प्रताप नगर थाना के धोखाधड़ी के मामलों में जेल में बंद था। इसके अलावा रवि कुमार पिता जय भगवान निवासी ग्राम बिंझौल थाना मॉडल टाउन पानीपत, कमल कश्यप पिता सुरेन्द्र कश्यप निवासी बिंझौल पानीपत को भी गिरफ्तार किया है। अभिषेक विश्वकर्मा समेत तीनों को रिमांड पर लिया गया है। आरोपियों ने बताया कि वे फर्जी कंपनियां बनाकर उनके नाम से करेंट अकाउंट खुलवाते थे।

इन्हीं खातों का उपयोग साइबर फ्रॉड की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। जांच में सामने आया कि ठगी गई राशि में से 20 लाख रुपये इन्हीं के द्वारा संचालित एक खाते के जरिए आगे भेजे गए थे। आरोपियों से सघन पूछताछ की जा रही है ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी गई शेष राशि के नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

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