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शिक्षकों को देनी होगी पात्रता परीक्षा, डीपीआई ने जारी किया आदेश, शिक्षक संगठनों ने किया विरोध

दो साल में परीक्षा पास नहीं होने पर सेवा से पृथक करने की होगी कार्यवाही

कटनी, यशभारत। बड़ी संख्या में जिले के शिक्षकों को भी अब शिक्षक पात्रता परीक्षा देनी होगी। ऐसे शिक्षक जिनका सर्विस पीरियेड 5 साल से अधिक है, उनको दो साल के भीतर परीक्षा पास करनी होगी। ये परीक्षा जुलाई-अगस्त में होगी। परीक्षा पास ना करने वाले शिक्षकों को सेवा से हटाने की कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में डीपीआई ने परीक्षा देने का आदेश जारी कर दिया है। इससे शिक्षकों पर नौकरी की तलवार लटक गई है। दूसरी ओर शिक्षक संगठनों ने इस परीक्षा का विरोध शुरू कर दिया है।

संचालनालय ने सभी संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत ऐसे सभी शिक्षकों को चिन्हित कर उन्हें पात्रता परीक्षा में शामिल होने के लिए सूचना दें। पात्रता परीक्षा का आयोजन जुलाई-अगस्त 2026 में किया जाना प्रस्तावित है। लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए तीन दिन पहले प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा को लेकर निर्देश जारी किए हैं। इसमें कहा है कि ऐसे शिक्षक जिनकी नियुक्ति शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने से पहले हुई है और जिनकी सेवानिवृत्ति में अभी 5 वर्ष से अधिक का समय शेष है, उन्हें सेवा में बने रहने के लिए अनिवार्य रूप से टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना होगा। शिक्षक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लोक शिक्षण संचालनालय ने राज्य के शिक्षकों की परीक्षा कराने के संबंध में संगठन उक्त आदेश को सरकार और शासन से निरस्त करने की मांग की है। शिक्षकों के हित में संगठन शीघ्र मुख्यमंत्री के संज्ञान में उक्त मुद्दे को रखेगा और आवश्यकता हुई, तो न्यायालय में रिव्यू पिटीशन भी लगायेगा। किसी भी परिस्थिति में 25 से 30 वर्ष की सेवा करने के बाद शिक्षकों की परीक्षा आयोजित करना न्याय संगत नहीं है।

इनका कहना है

माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हैं, मगर बात सरकार की नीयत और नीति की है जब माननीय उच्चतम न्यायालय कहता है कि 10 वर्ष तक कोई भी कर्मचारी शासकीय संस्थाओं में अस्थायी नहीं कहला जा सकता जिसने अपने जीवन के 10 वर्ष या उससे अधिक समय सरकार के विभाग में दिए हो शासन को चाहिए कि ऐसे कर्मचारी और उसके परिवार के भविष्य को सुरक्षित और संरक्षित करे, तब सरकार इस तरह आदेश के परिप्रेक्ष्य में ऊल-जुलूल नियम बताकर अपना पल्ला झाड़ने का प्रयास करती है।

– राजेश भारद्वाज, अतिथि शिक्षक नेता

आदेश अव्यवहारिक है

लगभग 25 वर्षों से सेवा में लगे शिक्षक अचानक पात्रता परीक्षा के लिए बाध्य किए जा रहे हैं। ऐसे आदेश न केवल अव्यवहारिक हैं, बल्कि शिक्षक वर्ग के मनोबल को भी तोड़ते हैं। हमारी पीढ़ी दर पीढ़ी शिक्षा देने की जिम्मेदारी में लगी रही, अब हमें परीक्षा देने की मानसिक तैयारी नहीं है। हम शिक्षा के अधिकार अधिनियम का सम्मान करते हैं, लेकिन हमारी वर्षों की सेवा और अनुभव की अनदेखी नहीं होने देंगे। शिक्षक संघ इस आदेश को तत्काल समाप्त कराने की मांग करता है।

— नवनीत चतुर्वेदी, प्रांताध्यक्ष

नीतिगत सिद्धांतों का मज़ाक बना दिया

“25–27 वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों से अब पात्रता परीक्षा लेने की बात कहना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि नीतिगत सिद्धांतों का मज़ाक भी है। शिक्षक समाज अपने अधिकार और सम्मान की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आवश्यकता पड़ी तो हर वैधानिक और लोकतांत्रिक कदम उठाया जाएगा। 15 मार्च को शिक्षक संयुक्त मोर्चा की बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी। सभी शिक्षक एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए खड़े रहें।”
— रमाशंकर “राजू” तिवारी, प्रांतीय संयोजक, आज़ाद अध्यापक संघ

परीक्षा के नाम पर कर रहे प्रताड़ित…

हम मध्यप्रदेश सरकार के कर्मचारी हैं और 1998 से आज तक हमारी नियुक्तियां मध्यप्रदेश सरकार के द्वारा तय मानकों की पूर्ति करने के उपरांत हुई हैं। यदि माननीय सर्वोच्च न्यायालय को उसमें कोई कमी दिखी है तो मध्यप्रदेश सरकार को माननीय सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करना चाहिए बजाय निर्दोष शिक्षकों के परीक्षा के नाम पर प्रताड़ित करने के।

– राकेश दुबे (प्रांताध्यक्ष)
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