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आदिवासी पहचान के लिए जरूरी है अलग धर्म कोड-उमंग सिंघार, अमरकंटक से उठी आवाज को नेता प्रतिपक्ष का समर्थन, समाज से एकजुट होकर केंद्र और राष्ट्रपति तक बात पहुँचाने की अपील

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में आदिवासी धर्म कोड की मांग एक बार फिर तेज होती दिखाई दे रही है। अमरकंटक से उठी इस मुहिम को अब नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का खुला समर्थन मिल गया है। सिंघार ने कहा कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को बचाने के लिए अलग धर्म कोड अत्यंत आवश्यक है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी अलग परंपराएं, आस्था और जीवन शैली है, जिसे किसी अन्य धर्म की श्रेणी में जोड़ना उनके अस्तित्व और पहचान के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से आदिवासी समाज अलग धर्म कोड की मांग करता आ रहा है और अब समय आ गया है कि इस मांग को गंभीरता से सुना जाए।
सिंघार ने आदिवासी समाज से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि सभी को मिलकर इस मांग को मजबूती से उठाना होगा, ताकि केंद्र सरकार और देश के राष्ट्रपति तक आदिवासियों की आवाज प्रभावी तरीके से पहुँच सके। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल धर्म कोड की नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है।
उन्होंने विश्वास जताया कि यदि समाज संगठित होकर अपनी बात रखेगा तो सरकार को इस मांग पर विचार करना पड़ेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की परंपराओं और आस्थाओं का सम्मान करते हुए उन्हें अलग धर्म कोड दिया जाना चाहिए।

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