कटनीजबलपुरमध्य प्रदेश

हाईकोर्ट ने लगाया सरकार की कार्रवाई पर ब्रेक!

राइस मिलर्स को राहत, 55% चावल जमा करने की शर्त पर मिली सुरक्षा

उच्च न्यायालय ने सरकार की कार्रवाई पर ब्रेक लगाया!

राइस मिलर्स को राहत, 55% चावल जमा करने की शर्त पर मिली सुरक्षा

कटनी, यशभारत। मध्य प्रदेश में धान मिलिंग नीति को लेकर चल रहे विवाद में राइस मिलर्स को बड़ी राहत मिली है। जबलपुर स्थित उच्च न्यायालय ने सरकार और एम.पी. स्टेट सिविल ऑक्सफोर्ड कॉर्पोरेशन की ओर से सख्त कार्रवाई पर रोक लगा दी गई है।
यह आदेश WP क्रमांक 699/2026 (एम/एस बजरंग राइस मिल एवं अन्य बनाम राज्य शासन एवं अन्य) में राकांपा विशाल मिश्रा की एकलपीठ द्वारा जारी किया गया।

❗टेस्ट मिलिंग रिपोर्ट पर उठाएँ प्रश्न

कंपनियों ने सरकार की धान मिलिंग नीति को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि जिस “टेस्ट मिलिंग रिपोर्ट” के आधार पर कार्रवाई की जा रही है, उसे न तो उन्हें दिया गया और न ही अदालत के समक्ष पेश किया गया।
मिलर्स का तर्क है कि बिना रिपोर्ट किए और बिना जवाब का मौका दिए कार्रवाई करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

⚖पहले भी मिली है ऐसी ही राहत

मामले की सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि इसी तरह का विवाद पहले WP नंबर 15454/2025 में उठाया गया था। उस मामले में 9 मई 2025 को उच्च न्यायालय ने स्पष्ट आदेश दिया था कि यदि मिलर्स धान की आपूर्ति के अनुपात में 55% चावल जमा कर देता है, तो उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
वर्तमान मामले में अदालत ने माना कि ग्रेटर पूर्व मामले के मिलर्स की तरह ही स्थिति में हैं। “समानता” के सिद्धांत को लागू करते हुए उन्होंने वैयक्तिक राहत को दोगुना कर दिया।

📌 कोर्ट का सख्त लेकिन रुख का रुख

उच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि मिलर्स के खिलाफ अगली सुनवाई तक कोई कठोर कार्रवाई नहीं होगी।
शर्त के रूप में उन्हें 55% चावल जमा करना होगा।
सभी प्रतिभागियों को दो सप्ताह में उत्तर देने के निर्देश दिए गए हैं। मामले को दो सप्ताह बाद WP नंबर 42952/2025 के साथ सूचीबद्ध किया जाएगा।

🏛सरकार पर बढ़ाया सीमेंट का दबाव

इस आदेश के बाद जहां राज्य के राइस मिलर्स ने राहत की सांस ली है, वहीं सरकार और संबंधित निगमों पर अब कोर्ट में ठोस जवाब पेश करने का दबाव बढ़ा है।
आगामी समीक्षा में यह साफ किया जाएगा कि धान मिलिंग नीति पर उठाए गए विवाद की दिशा क्या है – लेकिन विलासिता उच्च न्यायालय ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि बिना स्थापना के कार्रवाई नहीं होगी।

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