सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ जिला प्रशासन सागर ने निर्वाचन प्रणाली के आधुनिकीकरण में समूचे मध्यप्रदेश के समक्ष एक नई मिसाल पेश की है। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी संदीप जीआर के कुशल मार्गदर्शन में सागर जिले को ‘पेपरलेस निर्वाचन’ की तकनीक को सफलतापूर्वक और निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए राज्य स्तर पर विशिष्ट सम्मान से नवाजा गया है। भोपाल स्थित निर्वाचन भवन में आयोजित राज्य निर्वाचन आयोग के 32वें स्थापना दिवस के गरिमामय अवसर पर सागर की इस उपलब्धि को प्रदेश स्तर पर सराहा गया।
निर्वाचन भवन में गूंजा सागर का नाम
राजधानी भोपाल में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज श्रीवास्तव, डॉ. आर. परशुराम, ओ.पी. रावत और सिद्धार्थ सेठ जैसे वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में सागर कलेक्टर को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। सागर के साथ ही दमोह और बैतूल के जिला निर्वाचन अधिकारियों को भी उनकी उपलब्धियों के लिए यह गौरव प्राप्त हुआ है। इस ऐतिहासिक सफलता पर संभाग कमिश्नर अनिल सुचारी ने कलेक्टर संदीप जी आर और उनकी पूरी चुनावी टीम को विशेष बधाई देते हुए इसे जिले के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है।
तकनीक का बेजोड़ संगम: ऐसे संपन्न हुआ ‘डिजिटल’ मतदान
कलेक्टर संदीप जीआर ने इस नवाचार की सफलता साझा करते हुए यश भारत के संभागीय ब्यूरो को बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा सागर को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चुना गया था। इस आधुनिक प्रक्रिया के तहत मतदान केंद्रों पर कागज का मोह त्यागकर पूरी तरह डिजिटल प्रणाली अपनाई गई। इसमें पीठासीन अधिकारी के सभी प्रपत्र कंप्यूटर के माध्यम से भरे गए और मतदाता सूची भी डिजिटल रूप में ही उपलब्ध रही। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव मतदाता सत्यापन और हस्ताक्षर की प्रक्रिया में रहा, जहाँ पारंपरिक रजिस्टरों के स्थान पर ‘सिग्नेचर कैप्चर डिवाइस’ का उपयोग किया गया और मतदाताओं ने ई-पेन के माध्यम से अपने डिजिटल हस्ताक्षर दर्ज किए।
तीन जनपदों के नौ केंद्रों पर सफल रहा प्रयोग
सागर जिले की तीन जनपद पंचायतों में इस आधुनिक पद्धति का सफल प्रयोग किया गया, जिसमें जनपद पंचायत खुरई की ग्राम पंचायत हलऊ, जैसीनगर की ग्राम पंचायत औरिया एवं अगरा, तथा राहतगढ़ की ग्राम पंचायत सेमरा लहरिया के कुल नौ मतदान केंद्र शामिल रहे। इन सभी केंद्रों पर बिना किसी तकनीकी बाधा के मतदान संपन्न होना प्रदेश की भविष्य की चुनावी दिशा को तय करता है। बिना कागज के उपयोग के संपन्न हुए इस निर्वाचन ने न केवल चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुलभ बनाया है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा संदेश दिया है।
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