
वर्षों का इंतजार पर उम्मीद बरकरार,अरब सागर में शिवाजी महाराज की
भव्य प्रतिमा
मुंबई, यश भारत । अरब सागर में छत्रपति शिवाजी महाराज की भव्य प्रतिमा और स्मारक बनाने की महत्वाकांक्षी योजना एक बार फिर चर्चा में है। यह परियोजना महाराष्ट्र की सांस्कृतिक अस्मिता और शिवाजी महाराज के शौर्य, दूरदर्शी शासन तथा राष्ट्रनिर्माण के योगदान को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का प्रतीक मानी जाती है। लेकिन इसकी राह आसान नहीं दिख रही है और यह योजना बीते कई वर्षों से लंबित पड़ी है।
बता दें कि ‘शिव स्मारक’ परियोजना की औपचारिक शुरुआत 24 दिसंबर 2016 को की गई थी। प्रस्ताव के अनुसार, मुंबई तट से कुछ दूरी पर समुद्र के बीच एक कृत्रिम द्वीप तैयार कर उस पर पेडेस्टल सहित लगभग 212 मीटर ऊंची शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित की जानी थी। दावा किया गया था कि यह दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमाओं में शामिल होगी और 2022 के अंत तक इसका निर्माण पूरा हो जाएगा। लेकिन वास्तविकता में परियोजना समय पर आगे नहीं बढ़ सकी।
देरी के पीछे कई कारण रहे बताये जा रहे हैं। समुद्र में निर्माण को लेकर पर्यावरणीय चिंताओं के चलते अदालतों में याचिकाएं दाखिल हुईं और सुप्रीम कोर्ट द्वारा कुछ समय के लिए काम पर रोक भी लगी। इसके अलावा, तटीय क्षेत्र नियमों (सी आर जेड ), समुद्री जैव-विविधता, सुरक्षा और तकनीकी पहलुओं पर बार-बार अध्ययन करना पड़ा। नीतिगत निर्णयों, ठेकेदारों में बदलाव और लागत आकलन ने भी परियोजना की गति को धीमा किया।
महाराष्ट्र सरकार ने अरब सागर में भूमि पुनः प्राप्ति और स्मारक के पहले चरण के निर्माण के लिए लार्सन एंड टूब्रो (एलएंडटी) को कार्यादेश जारी किया है। लगभग ₹3,826 करोड़ की लागत से प्रारंभिक कार्य किए जाने की योजना है। भूमि निर्माण कार्य छह महीने में पूरा करने और पूरे स्मारक को करीब तीन वर्षों में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। करीब नौ साल के लंबे इंतजार के बाद भी शिव स्मारक परियोजना आगे बढ़ती दिखाई नहीं दे रही है।







