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मुंबई पुलिस की पकड़ से दूर हैं माफिया बिश्नोई भाई

मुंबई, यश भारत

मुंबई पुलिस की पकड़ से दूर हैं माफिया बिश्नोई भाई

मुंबई, यश भारत मुंबई पुलिस समेत देश के कई राज्यों की पुलिस एक अजीब कानूनी स्थिति का सामना कर रही है। जिन मामलों में बिश्नोई गैंग को मुख्य साजिशकर्ता बताया जा रहा है, उन्हीं मामलों में पुलिस कथित मास्टरमाइंड बिश्नोई भाइयों को अपनी कस्टडी में लेकर पूछताछ नहीं कर पा रही है।

रविवार को फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के आवास के बाहर हुई फायरिंग की घटना में सोशल मीडिया पर एक ऐसे अकाउंट ने जिम्मेदारी ली है, जिसे बिश्नोई गैंग से जुड़ा बताया जा रहा है। इसके बावजूद, इस मामले में भी मुंबई पुलिस के लिए बिश्नोई भाइयों तक पहुंच पाना मुश्किल माना जा रहा है।

इससे पहले 14 अप्रैल 2024 को अभिनेता सलमान खान के बांद्रा स्थित गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हुई फायरिंग के मामले में मुंबई पुलिस ने अपनी चार्जशीट में लॉरेंस बिश्नोई को साजिशकर्ता बताया था। चार्जशीट में उन्हें “फरार आरोपी” के रूप में नामजद किया गया था।

आमतौर पर फरार आरोपी वह होते हैं, जो पुलिस की पकड़ से बाहर हों, लेकिन इस मामले में लॉरेंस बिश्नोई साबरमती जेल में बंद थे। इसके बावजूद मुंबई पुलिस उन्हें कस्टडी में लेकर पूछताछ नहीं कर सकी।

इसी तरह, 12 अक्टूबर 2024 को एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की उनके बेटे के बांद्रा स्थित कार्यालय के बाहर हत्या के मामले में मुंबई पुलिस ने लॉरेंस बिश्नोई के छोटे भाई अनमोल बिश्नोई को वांछित आरोपी बताया।

अनमोल पिछले कुछ वर्षों से कनाडा और अमेरिका में छिपे होने के संदेह में था, लेकिन नवंबर 2025 में उसे भारत डिपोर्ट कर दिया गया। इसके बाद भी अब तक मुंबई पुलिस उसकी कस्टडी हासिल नहीं कर पाई है।

वर्तमान मामले में भी यदि बिश्नोई गैंग की संलिप्तता साबित होती है, जैसा कि गैंग के सहयोगी बताए जा रहे शुभम लोणकर से जुड़े एक सोशल मीडिया अकाउंट द्वारा दावा किया गया है, तो हालात पहले जैसे ही रहने की संभावना है।

मुंबई पुलिस के लिए सबसे बड़ी बाधा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 303 है, जिसे गृह मंत्रालय  ने लागू किया है। इस धारा के तहत, केंद्र सरकार (एनआईए जैसी केंद्रीय एजेंसियों के मामलों में) या राज्य सरकार यह आदेश दे सकती है कि किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग को उस जेल से बाहर न ले जाया जाए, जहां वे बंद हैं। जब तक यह आदेश प्रभावी रहता है, तब तक संबंधित आरोपी को किसी अन्य एजेंसी या राज्य की पुलिस कस्टडी में सौंपा नहीं जा सकता।

यही कानूनी प्रावधान बिश्नोई भाइयों से पूछताछ में सबसे बड़ी रुकावट बना हुआ है, जिससे हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच कर रही मुंबई पुलिस की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं

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