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प्राइम टाइम विथ आशीष शुक्ला में डॉक्टर परिमल स्वामी से खास चर्चा,स्वास्थ्य में एआई की भूमिका

2026 में चिकित्सा का नया ट्रेंड पर्सनलाइजेशन और वेलनेस पर जोर

जबलपुर,यशभारत। देश और प्रदेश में चिकित्सा जगत में अपनी पहचान बना चुके डॉ. परिमल स्वामी ने हाल ही में यशभारत के विशेष सेशन में 2026 में इलाज के नए ट्रेंड और मरीज-डॉक्टर संबंध पर विस्तृत जानकारी दी। डॉ. स्वामी ने कहा कि आज का दौर एआई (Artificial Intelligence) और नई तकनीकों का है। एआई मरीजों को व्यापक जानकारी दे सकता है, लेकिन इसका उपयोग सावधानी से करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि एआई में हैल्यूसिनेशन यानी गलत या भ्रामक जानकारी का खतरा रहता है।

इसलिए मरीजों को कभी भी एआई की जानकारी बिना योग्य चिकित्सक से परामर्श के लागू नहीं करनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डॉक्टरों के लिए एआई अत्यंत उपयोगी उपकरण हो सकता है। यदि डॉक्टर मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री एआई में डालते हैं, तो दवाइयों के संभावित टकराव और साइड इफेक्ट की जांच की जा सकती है, जिससे इलाज में गलतियों की संभावना कम होती है।

डॉ. स्वामी ने जोर देकर कहा कि स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और तनाव प्रबंधन ही दीर्घकालिक स्वास्थ्य की कुंजी हैं। उन्होंने मरीजों को अपने ब्लड प्रेशर, शुगर और अन्य मेडिकल रिकॉर्ड नियमित रूप से संभालकर रखने की सलाह दी। डॉ. स्वामी ने कहा, आज मरीज और डॉक्टर का संबंध 15-20 मिनट की सलाह तक सीमित नहीं है। बीमारी मरीज के जीवनभर के साथ रहती है, इसलिए मरीज को अपनी स्वास्थ्य जानकारी और जीवनशैली के प्रति सजग रहना होगा। इस सेशन में यह भी बताया गया कि बच्चों (12-18 वर्ष) के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है, और इस पर आगामी चर्चा होगी। डॉ. परिमल स्वामी के अनुसार 2026 में चिकित्सा का भविष्य तकनीक, पर्सनलाइजेशन और वेलनेस के संतुलन पर आधारित होगा, जिससे मरीज बेहतर, सुरक्षित और दीर्घकालिक स्वास्थ्य की ओर बढ़ सकते हैं।

रिपोर्ट के आधार पर विशेष उपचार तैयार किया जाएगा

डॉ. स्वामी ने बताया कि 2026 में इलाज का मुख्य ट्रेंड पर्सनलाइजेशन और वेलनेस होगा। पर्सनलाइजेशन का अर्थ है कि हर मरीज के शरीर की बनावट, जेनेटिक हिस्ट्री, खान-पान की आदतों और रिपोर्ट के आधार पर विशेष उपचार तैयार किया जाएगा। उदाहरण के लिए, शुगर, ब्लड प्रेशर या कैंसर जैसी बीमारियों में मरीज का पूरा इतिहास देखकर दवाइयों और लाइफस्टाइल की योजना बनाई जाएगी, ताकि भविष्य में जटिलताओं की संभावना कम हो। वेलनेस का मतलब केवल बीमार न होना नहीं, बल्कि शरीर और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है।

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