अप के बाद अब डाउन ट्रैक पर फोकस, 2026 तक कम्पलीट होने की उम्मीद, जल्द शुरू होगा मालगाडिय़ों का परिचालन

कटनी, यशभारत। 1800 करोड़ की लागत से बन रहे एशिया के सबसे लंबे कटनी ग्रेट सेपरेटर ब्रिज के डाउन ट्रैक का निर्माण कार्य तेजी से कराया जा रहा है। अप टै्रक के निर्माण के बाद डाउन टै्रक का निर्माण जल्द से जल्द पूरा कराए जाने की योजना पर काम हो रहा है। वैसे इसे 2024 में ही पूरा होना जाना था। अब 2026 में कटनी ग्रेट सेपरेटर ब्रिज के डाउन ट्रैक के निर्माण की म्याद तय की गई है। सब कुछ ठीक रहा तो लगभग 16 किलोमीटर से अधिक लंबाई वाले डाउन ट्रैक से मालगाडिय़ों का परिचालन शुरू हो जाएगा। रेलवे सूत्रों के अनुसार ग्रेट सेपरेटर का अप ट्रैक पहले ही तैयार हो चुका है, जिस पर मालगाडिय़ों का परिचालन भी शुरू हो गया है। डाउन ट्रैक पर रेल लाइन को क्रॉस कराने के लिए बड़े निर्माणाधीन ब्रिज का कार्य चल रहा है, जिसके कारण इस हिस्से में थोड़ा अधिक समय लग रहा है। इसको लेकर इरकॉन और एलएनटी द्वारा रेलवे से 4 घंटे का मेगा ब्लॉक लिया गया था। इस दौरान 70 से 80 मीटर लंबे विशाल लोहे के ब्रिज स्ट्रक्चर को गायत्री नगर स्थित कर्व, बिलासपुर रेल लाइन के ऊपर सावधानीपूर्वक खिसकाकर स्थापित किया गया। कार्य प्रारंभ से पूर्व विधि-विधान से पूजन किया गया, जिसमें रेलवे विभाग, इरकॉन और एलएनटी के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। निर्माण कार्य के दौरान एक पैसेंजर ट्रेन और कुछ मालगाडिय़ां प्रभावित रहीं, चूंकि यह इलाका रहवासी क्षेत्र है, इसलिए एलएनटी के कर्मचारियों ने भारी-भरकम स्ट्रक्चर को धीमी गति और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के साथ स्थापित किया, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
अब तक हो चुका इतना काम
जानकारी के अनुसार झलवारा से न्यू मझगवां फाटक तक बने ग्रेड सेपरेटर को सिंगरौली की ओर से आने वाले रेलखंड से दो माह पहले ही जोड़ा जा चुका है, वहीं अब बिलासपुर की ओर से आने वाली ट्रेनों को ग्रेड सेपरेटर से जोडऩे कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में सिर्फ सिंगरौली की ओर से आने वाली ट्रेनें ही इसमें आगे बढ़ पाती है, वहीं अब बिलासपुर रेल लाइन जुडऩे से मालगाडिय़ां एनकेजे को बाइपास करते हुए सीधे बीना रेलखंड पर रवाना होंगी। इसके लिए यार्ड रिमॉडलिंग भी की जा रही है। नये सिंग्नल सहित अन्य जरूरी कार्य कराए जाएंगे।
ऐसे हुआ है ग्रेड सेपरेटर का निर्माण
कटनी ग्रेड सेपरेटर परियोजना की कुल लागत लगभग 1800 करोड़ रुपए है। यह ग्रेड सेपरेटर भारत का सबसे लंबा रेलवे वायाडक्ट है, जो न केवल संरचनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि रेलवे संचालन में भी नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा। परियोजना की कुल लंबाई 33.40 किलोमीटर है, जिसमें डाउन ग्रेड सेपरेटर 17.52 किलोमीटर और अप ग्रेड सेपरेटर 15.35 किलोमीटर शामिल हैं। अप साइड 1570 फाउंडेशन और 264 पियर्स व डाउन साइड 2592 फाउंडेशन और 425 पियर्स का निर्माण कराया गया है। गौरतलब है कि अप्रैल महीने में रेलवे ने ग्रेड सेपरेटर के अप ट्रेक में कार्य पूरा होने के बाद कटंगीखुर्द स्टेशन से न्यू मझगवां स्टेशन तक रेलगाड़ी का सफल परिचालन किया था और अब लगातार ग्रेड सेपरेटर से मालगाड़ी दौड़ रही हैं।
ग्रेड सेपरेटर परियोजना के यह होंगे फायदे
बीना-कटनी रेलखंड में मालगाडिय़ों की संख्या और गति में वृद्धि होगी। कटनी से बिलासपुर और सिंगरौली के लिए अतिरिक्त रेल लाइन जुड़ जाएगी, जिससे न्यू कटनी, कटनी मुड़वारा जैसे व्यस्त क्षेत्रों को बायपास किया जा सकेगा। माल यातायात में वृद्धि के कारण फ्रेट ट्रेनों के संचालन समय में कमी आएगी और यातायात आसान होगा, इसके अलावा पश्चिम मध्य रेल के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
क्या कहते हैं रेलवे के अधिकारी
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि डाउन ट्रैक को 2026 में पूरा करा लिया जाएगा। जैसे ही अप और डाउन दोनों ट्रैक पूरी तरह सुचारू हो जाएंगे, तब इस पर मालगाडिय़ों का आवागमन होगा। इससे रेलवे को राजस्व प्राप्त होगा, वहीं यात्री ट्रेनों की गति में भी वृद्धि होगी और ट्रेनें समय पर अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगी। इस मेगा प्रोजेक्ट का उद्देश्य ट्रेनों की लेटलतीफी को कम करना और रूट को अधिक कुशल बनाना है। ग्रेड सेपरेटर के निर्माण से ट्रेनों को बिना किसी रुकावट के एक-दूसरे से अलग-अलग दिशाओं में चलने का रास्ता मिलेगा, जिससे समय की बचत और यात्रियों को बेहतर सुविधा सुनिश्चित होगी।







