गोवा नाइट क्लब में भीषण आग: सिलेंडर ब्लास्ट से 25 की मौत; सेफ्टी नियमों की अनदेखी पर उठे सवाल

गोवा नाइट क्लब में भीषण आग: सिलेंडर ब्लास्ट से 25 की मौत; सेफ्टी नियमों की अनदेखी पर उठे सवाल
भोपाल, यशभारत: गोवा के पर्यटन क्षेत्र अरपोरा में शनिवार देर रात एक नाइट क्लब में हुए भीषण अग्निकांड में कम से कम 25 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 6 अन्य घायल हुए हैं। पुलिस ने पुष्टि की है कि ज्यादातर मौतें आग की लपटों के बजाय दम घुटने से हुईं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि क्लब में फायर सेफ्टी के नियमों की घोर अनदेखी की गई थी।
किचन से शुरू हुई आग
पुलिस के अनुसार, यह त्रासदी देर रात करीब 12 बजे एक सिलेंडर ब्लास्ट के कारण शुरू हुई। यह धमाका इतना जोरदार था कि ग्राउंड फ्लोर पर स्थित रसोई (किचन) से आग तेज़ी से पूरे क्लब में फैल गई। आग पर काबू पाने में फायर ब्रिगेड को काफी मशक्कत करनी पड़ी। डीजीपी आलोक कुमार ने बताया कि बरामद किए गए 25 शवों में ज्यादातर क्लब के कर्मचारी थे, जबकि मरने वालों में 4 पर्यटक भी शामिल हैं। भागने की कोशिश के दौरान दो लोगों के शव सीढ़ियों पर पाए गए।
मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश
घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और स्थानीय विधायक माइकल लोबो मौके पर पहुंचे। मुख्यमंत्री सावंत ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने X पर पोस्ट कर बताया कि यह गोवा के लिए बहुत दुखद दिन है और उन्होंने उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।
CM सावंत ने स्पष्ट किया कि, “जांच में यह पता लगाया जाएगा कि आग कैसे लगी और क्या वहां फायर सेफ्टी और बिल्डिंग के नियमों का सही तरह पालन किया गया था या नहीं। जो भी इस घटना के लिए जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। किसी भी तरह की लापरवाही को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
फोरेंसिक टीम जुटी, सेफ्टी ऑडिट की मांग
शुरुआती जांच रिपोर्टें स्पष्ट रूप से क्लब प्रबंधन की लापरवाही की ओर इशारा कर रही हैं। प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम आग लगने की असली वजह और सुरक्षा खामियों की गहन जांच कर रही है।
इस बीच, स्थानीय भाजपा विधायक माइकल लोबो ने राज्य के सभी नाइट क्लबों और रेस्टोरेंटों के तत्काल सेफ्टी ऑडिट की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह घटना चिंताजनक है और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाना अनिवार्य है। लोबो ने बताया कि ज्यादातर लोगों की मौत बेसमेंट की तरफ भागते समय दम घुटने से हुई, जिससे यह पता चलता है कि निकास मार्ग अवरुद्ध थे या वेंटिलेशन की उचित व्यवस्था नहीं थी।







