शराब तस्करों पर पुलिस का शिकंजा,आबकारी विभाग बजा रहा चैन की बंशी
आबकारी विभाग पर उठ रहे सवाल

जबलपुर, यशभारत। जिले में अवैध शराब का कारोबार किस कदर फल-फूल रहा है, यह बात पुलिस की लगातार हो रही कार्यवाहियों से साफ झलक रही है। लेकिन यह भी उतना ही स्पष्ट है कि जिस विभाग को इस गोरखधंधे पर लगाम कसनी चाहिए वही विभाग ‘खामोश तमाशबीन’ बन बैठा है। आबकारी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अपने कार्यालयों में चैन की बंसी बजा रहे हैं, जबकि पुलिस अपनी सीमित संसाधनों के बावजूद अवैध शराब माफिया पर शिकंजा कसने में जुटी हुई है।
बरेला पुलिस ने पकड़ी अंग्रेजी शराब से लदी कार
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) सूर्यकांत शर्मा और उप पुलिस अधीक्षक आकांक्षा उपाध्याय के मार्गदर्शन में थाना बरेला पुलिस ने 26 अक्टूबर की रात एक अर्टिका कार (एमपी 20 डब्ल्यूए 6677) को पकड़ा। कार की तलाशी में 8 कार्टून अंग्रेजी शराब मिली, जिनमें रॉयल स्टैग, बकार्डी ब्लैक, एमडी रम, बकार्डी लेमन और ओल्ड मंक जैसी ब्रांड शामिल थीं। गिरफ्तार आरोपी राहुल मधुकर (24 वर्ष, निवासी बिझिया, मंडला) से लगभग 283,760 कीमत की शराब जब्त की गई। इस कार्रवाई में उप निरीक्षक के.पी. झारिया और प्रधान आरक्षक सुमन पांडे की सराहनीय भूमिका रही।
इसी तरह थाना शहपुरा पुलिस ने ग्राम हरदुआ में दबिश देकर मक्के के ढेर में छिपाई गई 14 पेटियों में कुल 700 पाव देशी शराब बरामद की। पुलिस ने मौके से भीकम सिंह लोधी (24 वर्ष, निवासी हरदुआ) को गिरफ्तार किया, जबकि उसके साथी कमलेश सिंह लोधी और सचिन पटेल फरार हो गए। बरामद शराब की कीमत लगभग 70,000 आंकी गई है। इस कार्रवाई में सहायक उप निरीक्षक सुरेश तिवारी, आरक्षक रवि कुमार, प्रमोद पटेल और सलमान खान की भूमिका सराहनीय रही।
आबकारी विभाग पर उठ रहे सवाल
जबलपुर में पुलिस लगातार बड़ी-बड़ी खेपें पकड़ रही है, लेकिन सवाल यह उठता है कि आबकारी विभाग आखिर कर क्या रहा है? ना तो कोई सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है, ना ही कोई उल्लेखनीय कार्रवाई। सूत्रों की मानें तो विभाग के कुछ अधिकारी व कर्मचारी ठेकेदारों और बार संचालकों से होने वाली वसूली में ही मशगूल रहते हैं, जबकि गांव-गांव में अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है।
पुलिस का सख्त रुख पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय ने बताया कि जिलेभर में अवैध शराब और मादक पदार्थों के खिलाफ सघन अभियान जारी रहेगा। किसी भी तस्कर या सहयोगी को बख्शा नहीं जाएगा। शहरवासियों और ग्रामीणों का कहना है कि अगर पुलिस जैसी तत्परता आबकारी विभाग भी दिखाए, तो अवैध शराब की जड़ें उखाड़ना मुश्किल नहीं।







