
जबलपुर,यशभारत। सनातन धर्म में दशहरे के पर्व का विशेष महत्व है और हर वर्ष यह पर्व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। दशहरे से जुड़ी कई मान्यताएं भी प्रसिद्ध हैं.पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी को देखने से भाग्योदय होता है और दरिद्रता दूर होती है। इसलिए इस दिन लोग अपने घरों की छत पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन करने के लिए आकाश को निहारते हैं ताकि साल भर जीवन में शुभ कार्य का सिलसिला चलता रहे। नीलकंठ के दर्शनों के साथ दशहरे के दिन शमी के पेड़ की पूजा करने का भी विधान है।
दशहरा पर नीलकंठ का दर्शन बेहद शुभ
शास्त्रों में दशहरा के दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन करना बहुत शुभ माना गया है. मान्यताओं के अनुसार दशहरा के दिन अगर किसी को नीलकंठ पक्षी दिख जाए तो उस व्यक्ति का घर धन-धान्य से भर जाता है. उस व्यक्ति के सारे कार्य सफल होते हैं. दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी दिखने का मतलब एक शुभ शुरुआत माना जाता है. यह पक्षी सौभाग्य का प्रतीक होता है.आइए जानते हैं कि दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन करना क्यों शुभ माना जाता है.
नीलकंठ के दर्शन का पौराणिक महत्व
दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी का दर्शन शुभ मानने की एक पौराणिक कथा है. इस पक्षी को भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है. पुराणों के अनुसार रावण का वध करने के बाद भगवान राम पर ब्रह्माण हत्या का पाप लगा था. इससे पाप से मुक्ति पाने के लिए प्रभु राम ने भगवान शिव की आराधना की थी. राम को इस पाप से मुक्ति दिलाने के लिए शिव जी नीलकंठ पक्षी के रूप में ही प्रकट हुए थे.तभी से दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन करना शुभ माना जाता है.







