
यादगार रहेगा कलेक्टर दीपक सक्सेना का कार्यकाल
जबलपुर, यश भारत। जबलपुर कलेक्टर रहे दीपक सक्सेना को हाल ही में जनसंपर्क आयुक्त की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हालांकि, जबलपुर में उनका कार्यकाल लंबे समय तक याद किया जाएगा। यह कार्यकाल न केवल प्रशासनिक कसावट का उदाहरण रहा बल्कि राजनीतिक दबाव को दरकिनार कर दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ काम करने की मिसाल भी बना।
सक्सेना का आगमन उस दौर में हुआ था, जब जिले में बड़े पैमाने पर धान उपार्जन में भ्रष्टाचार उजागर हुआ था। सबसे पहले वेयरहाउस घोटाले में ब्लैकलिस्ट की गई अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की गई। यह जबलपुर के प्रशासनिक इतिहास में एक बड़ा कदम माना गया। इसके बाद स्कूलों की मनमानी फीस पर अंकुश लगाने की कार्रवाई पूरे देश में मिसाल बनी।
इतना ही नहीं, अपने ही विभाग के तहसीलदार को जमीन संबंधी गड़बड़ियों में दोषी पाए जाने पर बिना हिचकिचाहट मामला दर्ज कराया गया। धान मिलिंग प्रकरण में की गई सख्त कार्यवाही हमेशा चर्चा में रही। इसी मामले ने प्रदेश की मिलिंग नीति में बदलाव की रूपरेखा तैयार की।
जाते-जाते भी सक्सेना ने राशन घोटाले और मूंग खरीदी में हुई अनियमितताओं पर दो ही दिन में दो बड़ी कार्रवाई कर यह जता दिया कि प्रशासनिक ईमानदारी किसी दबाव से नहीं डिग सकती। इन मामलों में जहां राजनीतिक हस्तक्षेप था, वहीं भोपाल से भी प्रशासनिक दबाव था, लेकिन उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति ने सभी दबावों को दरकिनार कर दिया। इसके अलावा, कलेक्ट्रेट में रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की पहल भी उनकी बड़ी उपलब्धियों में रही, जिसे प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में अपनाया गया। प्रशासनिक अधिकारी कई होते हैं और सभी अपने-अपने स्तर पर अच्छा कार्य करते हैं, लेकिन जिस तरह दीपक सक्सेना ने राजनीतिक दबाव से परे रहते हुए कार्यकाल पूरा किया, वह अपने आप में एक मिसाल बन गया है।






