
फर्जी रजिस्ट्रेशन से हुआ मूंग घोटाला,20 से अधिक किसानों के नाम आ रहे सामने,
गलत पंजीयन पर हुई है एंट्री
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जबलपुर, यश भारत। बसेड़ी समिति के एम एल टी वेयरहाउस केंद्र में हुए करोड़ों रुपए के मूंग घोटाले में नई जानकारी सामने आई है, जिसमें फर्जी रजिस्ट्रेशन के माध्यम से कुछ किसानों द्वारा मूंग की एंट्री करवाने की जानकारी सामने आ रही है जिसको लेकर प्रशासन द्वारा मंगलवार की देर रात तक जिन रजिस्ट्रेशनों पर मूंग की एंट्री की गई है उनकी जांच की गई। जिसको लेकर यश भारत द्वारा पूर्व में ही जानकारी दी गई थी और अब उस खबर पर मुहर लग गई है जिसमें सबसे ज्यादा फर्जी रजिस्ट्रेशन बसेड़ी समिति के ही सामने आ रहे हैं, जिसे ज उक्त समिति के कर्मचारियों के द्वारा किया गया है।
स्वयं के नाम से जुड़े कई खसरे
यश भारत द्वारा जिन संदिग्ध रजिस्ट्रेशन की जांच की गई है उसमें स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि एक ही खसरे में कई कई नाम जोड़े गए हैं जबकि उन खसरों की बलदियत अलग-अलग है, कई जगह तो जाति के साथ-साथ दूसरे धर्म के लोगों के भी नाम एक ही रजिस्ट्रेशन में जुड़े हुए हैं और वह स्वयं के नाम से बताए गए हैं याने की जिस व्यक्ति द्वारा रजिस्ट्रेशन करवाया गया है उसके द्वारा जानकारी दी गई है कि उक्त खसरे उसके और उसके परिवार के हैं जबकि उन में जाति और धर्म अलग-अलग है जो की प्रथम दृष्टया स्पष्ट हो रहा है कि यह फर्जी रजिस्ट्रेशन है।
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कैसे हो गए सत्यापित
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल तो यह है कि जो फर्जी रजिस्ट्रेशन के आधार पर करोड़ों रुपए की मूंग का घोटाला हुआ है उसकी पहली कड़ी ही रजिस्ट्रेशन की होती है और यह रजिस्ट्रेशन जबकि गलत थे तो फिर कैसे कर दिए गए। जिसमें समिति के कर्मचारियों के साथ-साथ पटवारी तहसीलदार और एसडीएम भी दोषी है जिनके द्वारा सत्यापन किया गया। पहले स्तर पर तो स्वयं के कॉलम में बिना बलदियत के रजिस्ट्रेशन होना ही नहीं था और फिर उसके बाद पटवारी तहसीलदार और एसडीएम की आईडी से इन्हें पास नहीं होना था। यदि ऐसा हुआ है तो फिर समिति के साथ-साथ इन अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए जहां से भ्रष्टाचार की शुरुआत हुई है।
एनसीएमएल कंपनी की भूमिका संदिग्ध
इस पूरे मामले में एक प्रमुख पक्ष प्रशासन की जांच से बाहर है। जो की उक्त मूंग को पास करने वाली सर्वेयर एजेंसी है। जबकि प्रारंभिक जांच में यह बात स्पष्ट हो रही है कि बिना मूंग लाये ही उसकी एंट्री कर दी गई ऐसे में उक्त एंट्री के पहले सर्वेयर द्वारा पास किया जाता है जब सर्वेयर अपनी लॉगिन आईडी खोलकर उक्त रजिस्ट्रेशन को ओपन करता है और उसमें संबंधित मात्रा को पास करता है तभी उसमें समिति का ऑपरेटर एंट्री कर सकता है ऐसे में सवाल उठता है कि क्वालिटी का काम देखने वाले एनसीएमएल कंपनी के कर्मचारियों के द्वारा कैसे बिना लाए हुए ही सिर्फ कागजों पर मूंग को पास कर दिया गया, इसके बाद उसकी फर्जी एंट्री हुई है। इस पूरे मामले में कंपनी की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है। इस केंद्र पर कंपनी द्वारा एक-एक करके तीन सर्वेयरों को नियुक्त किया गया था पहले एक को लगाया गया कुछ दिन के बाद दूसरा सर्वेयर भेज दिया गया फिर विवाद की स्थिति निर्मित हुई तो तीसरे सर्वे को भेज दिया गया ऐसे में किसी एक सर्वे पर जिम्मेदारी निर्धारित नहीं हो पा रही है। कंपनी की गतिविधियां पहले भी संदिग्ध रही है जिसको लेकर पूर्व में जबलपुर डीएमओ द्वारा उक्त कंपनी को खरीदी से बाहर रखने को लेकर भी पत्र लिखा था परंतु कोई कार्यवाही नहीं हुई।







