रातापानी अभयारण्य के वनग्राम नीलगढ़, धुनवानी के लोगों ने दी विस्थापन की सहमति – एपीसीसीएफ ने ग्राम पुनर्वास को लेकर लोगों से की रायशुमारी

रातापानी अभयारण्य के वनग्राम नीलगढ़, धुनवानी के लोगों ने दी विस्थापन की सहमति
– एपीसीसीएफ ने ग्राम पुनर्वास को लेकर लोगों से की रायशुमारी
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आशीष दीक्षित, भोपाल। राजधानी भोपाल से सटे रातापानी अभयारण्य के वनग्राम नीलगढ़ और धुनवानी के रहवासियों को विस्थापित करने के लिए प्रयास तेज कर दिए गए है। केद्र सरकार से विस्थापित करने की मजंूरी मिलने के बाद यहां के रहवासियों का आसपास के गांवों में बसाने की तैयारी की जा रही है। एपीसीसीएफ एल कृष्णमूर्ति दोनों गांवों में पहुंचे और स्थानीय लोगों से मुलाकात की। दोनों गांवों के रहवासियों ने ग्राम पुनर्वास के लिए अपनी सहमति जता दी है। केंद्र सरकार से इन दोनों गांवों के विस्थापन के लिए 15-15 करोड़ की राशि वन विभाग को दे दी गई है। दोनों गांवों के क्षेत्रफल के बराबर जमीन
प्राप्त जानकारी के अनुसार पुर्नवास के लिए दी गई वन भूमि नीलगढ़ और धुनवानी गांव के क्षेत्रफल के बराबर है। गांवों को संपर्क क्षेत्र में और सभी बुनियादी सुविधाओं के करीब बसाने की कार्ययोजना को अमलीजामा पहनाने की तैयारी की जा रह है। वन विभग कृषि भूमि, आवास अैर अन्य बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराएगा। खास बात यह है कि रातापानी प्रबंधन ने 250 एकड़ वन भूमि पुर्नवास के लिए स्थानांतरित करने की प्रक्रिया को प्रारंभ कर दिया है।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में किया जा चुका है विस्थापन
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में करीब आधा दर्जन गांवों में विस्थापन किया जा चुका है। यहां मिली सफलता के बाद रातापानी के गांवों को शामिल किया गया। वन विभाग के अधिकारियों के प्रयासों से वनग्रामों की दशा और दिशा दोनों बदली जिसके बाद विस्थापन के प्रयास तेज किए गए।
दो साल से अटकी थी प्रक्रिया
केंद्र सरकार द्वारा 2023 में विस्थापित करने के लिए अनुमति दी थी, लेकिन प्रक्रिया अटक गई थी। जंगल के बीच बसे इन गांवों के लोगों को जंगली वन्यप्राणियों से खतरा बना रहता है। विस्थापित किए जाने के बाद ग्रामीणों को किसी तरह का खतरा नहीं होगा। सामाजिक बदलाव तो होगा ही साथ ही आर्थिक रूप से बदलाव आ सकेगा।
कृषि भूमि भी उपलब्ध कराई जाएगी
कई वर्षों से इन गांवों में रह रहे लोगों को कृषि भूमि उपलब्ध कराई जा रही है साथ ही मुआवजा भी दिया जा रहा है। दोनों ही गांवों के लोग जगह छोडऩे के लिए तैयार हुए हैं ताकि उन्हें खुद की जमीन मिल सके। विस्थापित होने वाले ग्रामीणों को किसी प्रकार से परेशान न होना पड़े इसके लिए वन विभाग लगातार प्रयास कर रहा है।
मुआवजे में मिलेगी इतनी राशि
निर्धारित मापदंड के अनुसार पति-पत्नी को एक यूनिट माना गया है। परिवार में 18 साल के व्यस्क को एक यूनिट और परिवार की अविवाहित लडक़ी को एक यूनिट में रखा गया है। इस तरह किसी परिवार में चार यूनिट की गिनती होती है तो उस परिवार को 60 लाख रुपए तक का मुआवजा मिलेगा। मुआवजा के रूप में इन गांव के लोगों को 15 से 60 लाख रुपए तक की मुआवजा राशि मिलने वाली है।
लोगों ने सहमति दे दी है
रातापानी अभयाण्य के वनग्राम नीलगढ़ और धुनवानी के रहवासियों के साथ बैठक की गई है। लोगों ने विस्थापन के लिए सहमति जताई है। लोगों को किसी तरह की परेशानी ना हो इसे लेकर हर कदम उठाए जा रहे हैं।
– एल कृष्णमूर्ति, एपीसीसीएफ, वन विभाग






