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अमरकंटक में 7 साल बाद भी अधूरी नल-जल योजना: टैंकरों पर निर्भर लोग, गर्मियों में पानी की किल्लत से बढ़ा बीमारियों का खतरा

योजना का हाल: अधूरे टैंक, शुरू नहीं हुआ पाइपलाइन का काम

अमरकंटक में 7 साल बाद भी अधूरी नल-जल योजना: टैंकरों पर निर्भर लोग, गर्मियों में पानी की किल्लत से बढ़ा बीमारियों का खतरा

अमरकंटक, 18 अगस्त 2025: मिनी स्मार्ट सिटी के रूप में पहचान रखने वाली पवित्र नगरी अमरकंटक में पेयजल संकट एक गंभीर समस्या बना हुआ है। वर्ष 2018 में शुरू हुई 24 करोड़ रुपये की लागत वाली मुख्यमंत्री शहरी नल-जल योजना सात साल बाद भी अधूरी पड़ी है। नगर पालिका के 15 वार्डों में आज भी लोग टैंकरों और हैंडपंप पर निर्भर हैं, जबकि गर्मियों में पानी की बूंद-बूंद के लिए निवासियों को जूझना पड़ता है। हाल ही में दूषित पानी पीने से कई लोग पीलिया जैसी बीमारियों की चपेट में आ चुके हैं।

योजना का हाल: अधूरे टैंक, शुरू नहीं हुआ पाइपलाइन का काम
मुख्यमंत्री शहरी नल-जल योजना के तहत अमरकंटक में कपिलधारा मार्ग पर बैराज निर्माण, वॉटर ट्रीटमेंट फिल्टर प्लांट, इंटेक्स वेल, और तीन ओवरहेड टैंकों का निर्माण प्रस्तावित था। सात साल बाद भी केवल जमुना दादर और टिकरी टोला में दो ओवरहेड टैंक बनाए गए हैं, जो अभी भी अधूरे हैं। पाइपलाइन बिछाने का काम तो शुरू भी नहीं हो सका है।

वन विभाग की अनापत्ति बनी बाधा
योजना के तहत कपिलधारा मार्ग पर बैराज निर्माण की योजना थी, जो पूरे नगर में नल से जल आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। लेकिन यह क्षेत्र वन भूमि में होने के कारण वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) नहीं मिल सका। सर्वे का काम एक साल पहले पूरा हो चुका है, लेकिन राज्य स्तर पर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है।

नगरवासियों की परेशानी और बीमारियों का खतरा
स्थानीय निवासी वीरू तंबोली ने बताया कि जलेश्वर टोला, गुम्मा घाटी, और फर्री सेमर जैसे वार्डों में पानी की आपूर्ति का कोई स्थायी इंतजाम नहीं है। गर्मियों में पानी की भारी किल्लत रहती है, जिससे लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते हैं। हाल ही में कुएं का दूषित पानी पीने से कई लोग पीलिया की चपेट में आ गए, जिसने स्वास्थ्य जोखिमों को और बढ़ा दिया है।

ठेकेदार की लापरवाही और कार्रवाई की मांग
निवासी खिलेश्वर दुबे ने ठेकेदार की लापरवाही को इस देरी का मुख्य कारण बताया। उनका कहना है कि नगर पालिका और प्रशासन इस मामले में सख्ती नहीं बरत रहे। उन्होंने मांग की कि ठेकेदार का ठेका निरस्त कर नई एजेंसी को काम सौंपा जाए। मुख्य नगर पालिका अधिकारी चैन सिंह परस्ते ने कहा, “मुझे हाल ही में अमरकंटक का कार्यभार मिला है। जल्द ही ठेकेदार को पत्र लिखकर काम शुरू करने का निर्देश दिया जाएगा। वन विभाग से अनापत्ति नहीं मिलने के कारण भी देरी हो रही है।

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