जबलपुरमध्य प्रदेश

रक्षाबंधन पर बहन ने दिया जिंदगी का तोहफा

नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में सिकल सेल पीड़ित भाई का सफल स्टेम सेल ट्रांसप्लांट

जबलपुर। रक्षाबंधन से पहले भाई-बहन के रिश्ते की ऐसी मिसाल सामने आई, जिसने पूरे शहर को भावुक कर दिया। 5 वर्षीय मासूम, जो 2 साल की उम्र से सिकल सेल रोग से जूझ रहा था और कई बार रक्त आधान की आवश्यकता झेल चुका था, को उसकी 14 वर्षीय बहन ने जिंदगी का अनमोल तोहफा दिया। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज, जबलपुर में 3 से 4 महीने की तैयारी के बाद बहन से मैचिंग हुई और एफेरेसिस मशीन की मदद से परिधीय रक्त से स्टेम सेल एकत्र कर सफल प्रत्यारोपण किया गया।

टीमवर्क से मिली नई जिंदगी

यह उपलब्धि आदरणीय डीन डॉ. नवनीत सक्सेना के मार्गदर्शन और पूरे चिकित्सा दल की मेहनत का परिणाम है। इसमें पूर्व डीन डॉ. गीता गुइन, सुपरिटेंडेंट एससीआई डॉ. लक्ष्मी, सुपरिटेंडेंट डॉ. अरविंद शर्मा, एचओडी पीडियाट्रिक्स डॉ. मोनिका लाजरस, डॉ स्वेता पाठक नोडल इंचार्ज बीएमटी एवं टीम की डॉ. विद्या, डॉ. राजेश जैन, डॉ. राजेश महोबिया, डॉ. मीना सिंह, ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. शिशिर चिनपुरिया, डॉ. नरेंद्र पटेल, डॉ. तुषार दखाते, डॉ. रत्नेश सहित रेजिडेंट डॉक्टर – डॉ. चेस्टा, डॉ. पलाश, डॉ. काव्या, डॉ. ललिता का अहम योगदान रहा।

एनजीओ और नर्सिंग स्टाफ की अहम भूमिका

एनजीओ टीम के विश्वेंद्र, निशा, अश्विनी और दीपिका के साथ नर्सिंग स्टाफ पूनम और एलिजाबेथ रिंकी ने भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभी के संयुक्त प्रयास से मासूम को जिंदगी का नया अध्याय मिला।

रिश्तों की मिसाल

यह कहानी साबित करती है कि रक्षाबंधन सिर्फ राखी बांधने का त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के अटूट प्रेम और एक-दूसरे के लिए बलिदान की भावना का प्रतीक है। इस बहन ने अपने भाई को न सिर्फ रक्षा का वचन दिया, बल्कि उसे नया जीवन भी दिया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button