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वनवासी कल्याण आश्रम में महिलाओं ने मनाया हर्षोल्लास से हरियाली तीज का पर्व

वनवासी कल्याण आश्रम में महिलाओं ने मनाया हर्षोल्लास से हरियाली तीज का पर्व

संस्कृति, श्रद्धा और सौंदर्य का अद्भुत संगम : हरियाली तीज

जबलपुर। सावन की भीगी बयार और हरियाली की छांव में जब नारियों ने पारंपरिक परिधान और सौंदर्य से सजकर हरियाली तीज का उत्सव मनाया, तो वह दृश्य केवल एक पर्व नहीं, बल्कि संस्कृति की गूंज बन गया। रविवार को अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के प्रांत कार्यालय, मदन महल में आयोजित इस उत्सव में वनवासी विकास परिषद की महिला समिति द्वारा संस्कृति, श्रद्धा और सौंदर्य का अद्भुत संगम देखने को मिला।

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श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाने वाला हरियाली तीज पर्व सोमवार को उत्साहपूर्वक मनाया गया। सावन की हरियाली के बीच महिलाओं ने पारंपरिक परिधान पहनकर झूले झूले, मेंहदी रचाई और शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना कर सौभाग्य की कामना की।
यह पर्व विशेष रूप से सुहागन महिलाओं और कन्याओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं और मां पार्वती के साथ भगवान शिव की पूजा कर अपने वैवाहिक जीवन की मंगलकामना करती हैं। वहीं, अविवाहित युवतियां योग्य वर की प्राप्ति की कामना से यह व्रत रखती हैं।
हरे वस्त्रों में सजी महिलाओं की सजीव उपस्थिति, ढोलक और मंजीरे की मधुर तान पर गूंजते सावन गीत, और सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ ने इस आयोजन को एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना में परिवर्तित कर दिया। सोलह श्रृंगार से सजी महिलाएं जैसे प्रकृति की देवी बन इस पर्व को जीवंत कर रही थीं।
हरियाली तीज उत्सव पर महिलाओं की जुबान से निकले अनुभव बताते हैं कि यह आयोजन केवल उत्सव नहीं था, बल्कि “सांस्कृतिक आत्मचेतना की पुनर्प्रतिष्ठा” था। “आज हम सब बहनें एक साथ मिलकर जैसे अपने मायके के आँगन में लौट आईं हों,” यह शब्द इस आयोजन के आत्मीय और पारिवारिक स्वरूप को उजागर करते हैं।

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हरियाली तीज केवल श्रृंगार और झूलों का पर्व नहीं, बल्कि यह देवी पार्वती की अथक तपस्या, नारी शक्ति की दृढ़ संकल्पना और वैवाहिक सौभाग्य की कामना का प्रतीक है। यह पर्व नई पीढ़ी को यह सिखाता है कि संस्कारों और परंपराओं में ही भविष्य की जड़ें मजबूत होती हैं।
ये बहनें आज की भौतिकता से दूर एक ऐसा संदेश लेकर आईं हैं – जिसमें “सामूहिकता में ही शक्ति है, संस्कृति में ही आत्मबल है और प्रकृति के साथ एकाकार होकर ही जीवन का सच्चा आनंद संभव है।”
कार्यक्रम में महिलाओं ने कहा की ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों को नियमित किया जाए जिससे ग्रामीण और वनवासी समाज की स्त्रियाँ भी अपनी सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ी रहें, और नयी पीढ़ी भी इन मूल्यों को आत्मसात करे।
हरियाली तीज ने इस बार भी उल्लास, उमंग और परंपरा के रंगों से घर-आंगन को सराबोर कर दिया। इस अवसर  पर वनवासी विकास परिषद की महिला समिति की स भी बहने उपस्थित थी।

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