सिलेबस से बाहर के प्रश्न, माध्यम को लेकर उठे सवाल, आरडीवीवी में ड्यूटी की प्रवेश परीक्षा को लेकर विद्यार्थियों ने लगाये अनियमितताओ के आरोप

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में आयोजित डॉक्टोरल एंट्रेंस टेस्ट (DET) ने विश्वविद्यालय की शिक्षा व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जहां परीक्षा परिणाम शीघ्र जारी कर अपनी तत्परता दर्शाई, वहीं परीक्षा के आंकड़ों ने कई विभागों की शैक्षणिक गुणवत्ता की पोल खोल दी।परीक्षा में कुल 1361 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया, जिनमें से 936 परीक्षार्थी उपस्थित रहे। इनमें से मात्र 360 छात्र ही परीक्षा उत्तीर्ण कर सके। कुल परिणाम महज 38% रहा, जो विश्वविद्यालय स्तर की परीक्षा के लिए अत्यंत चिंताजनक है।
चार विषयों में शून्य परिणाम
सोशियोलॉजी, सोशल वर्क, जर्नलिज्म और अप्लाइड इकोनॉमिक्स जैसे प्रमुख विषयों में कुल 78 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी, लेकिन एक भी छात्र परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर सका। यह स्थिति विश्वविद्यालय के इन विभागों की शिक्षण पद्धति और पाठ्यक्रम पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
कानून विषय में भी गिरा स्तर
एलएलएम (लॉ) विषय में 49 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी, लेकिन सिर्फ 12 ही पास हो पाए। इस विषय में सिर्फ 24% परिणाम दर्ज किया गया।
माइक्रोबायोलॉजी में सिलेबस से बाहर के प्रश्न
माइक्रोबायोलॉजी विषय के परीक्षार्थियों ने आरोप लगाया है कि प्रश्न पत्र में कई प्रश्न सिलेबस से बाहर थे। परीक्षार्थियों ने कुलसचिव को ज्ञापन सौंपकर नए सिरे से मूल्यांकन की मांग की है। छात्रों ने बताया कि इस विषय में 10 प्रतिशत से भी कम विद्यार्थी पास हो पाए हैं।
भाषा को लेकर भी उठे सवाल
परीक्षा का प्रश्न पत्र सिर्फ अंग्रेज़ी में उपलब्ध था, जबकि आवेदन के समय अभ्यर्थियों को हिंदी भाषा चुनने का विकल्प दिया गया था। हिंदी माध्यम के परीक्षार्थियों ने इसपर आपत्ति जताई और इसे असमान व्यवहार बताया।
जूलॉजी में भी कमजोर परिणाम
जूलॉजी विषय में 66 विद्यार्थी परीक्षा में बैठे, जिनमें से केवल 6 विद्यार्थी सफल हो पाए। इस विषय में कुल 38 सीटें उपलब्ध थीं, लेकिन परिणाम बेहद निराशाजनक रहा







