भोपाल

पर्यावरणीय मंजूरी को सुप्रीम कोर्ट में अवैध बताया याचिका दायर, दो सप्ताह में शुरू होगी सुनवाई

पर्यावरणीय मंजूरी को सुप्रीम कोर्ट में अवैध बताया याचिका दायर, दो सप्ताह में शुरू होगी सुनवाई

भोपाल यशभारत। राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव निर्धारण प्राधिकरण (सिया) में दी गई 237 पर्यावरणीय मंजूरी को अवैध बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। करीब 265 पन्नों की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने दो सप्ताह में सुनवाई करने के आदेश दिए हैं। सिया के सचिव को अब अपना जवाब कोर्ट में प्रस्तुत करना होगा।

याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत की गई याचिका में कहा गया है कि पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, पर्यावरण (संरक्षण) नियम, 1986 और पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 के व्यवस्थित उल्लंघन में एसईआईएए, मध्य प्रदेश के सदस्य सचिव द्वारा दी गई 237 पर्यावरणीय मंजूरी को अवैध है।

सदस्य सचिव ने ईआईए अधिसूचना, 2006 के पैराग्राफ 3(7) और मध्य प्रदेश के लिए एसईआईएए और एसईएसी के गठन हेतु दिनांक 07.01.2025 की अधिसूचना के पैराग्राफ 5 के तहत अनिवार्य एसईआईएए बैठकें बुलाए बिना एकतरफा और अवैध रूप से 237 पर्यावरणीय मंज़ूरिया प्रदान की हैं।

यह वैधानिक अवधि बीत जाने के बाद स्वीकृत प्रावधानों का दुरुपयोग करने की एक सोची-समझी रणनीति है। जिससे कानून द्वारा अनिवार्य सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया को दरकिनार कर दिया जाता है। 11 जून 2024 से 6 जनवरी 2025 तक की महत्वपूर्ण अवधि के दौरान, मध्य प्रदेश में कोई भी समुचित रूप से गठित सिया या सेक अस्तित्व में नहीं था। जिसके परिणामस्वरूप एक प्रशासनिक शून्यता उत्पन्न हो गई । जिसने पर्यावरणीय मंज़ूरी प्रक्रिया की वैधता को मूलतः कमज़ोर कर दिया। अवैध कार्यों को रोकने के लिए सदस्य सचिव, प्रमुख सचिव, मुख्य सचिव सहित विभिन्न प्राधिकारियों को लगभग 48 ज्ञापन लिखे जाने के बावजूद, व्यवस्थित उल्लंघन बेरोकटोक जारी रहे। प्राधिकारियों ने इन ज्ञापनों पर आँखें मूंद ली हैं, जो न केवल यह दर्शाता है कि सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया कानून द्वारा अनिवार्य है।

 

 

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