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नाव से निरीक्षण करने पहुंचे जिला शिक्षा विभाग के अधिकारीः बरगी में शिक्षा की कड़वी सच्चाई: जर्जर स्कूल भवन और शैक्षिक गुणवत्ता की चुनौती

जबलपुर,  जबलपुर जिले के बरगी और उसके आस-पास के क्षेत्रों में शिक्षा की जमीनी हकीकत का सामना करने के लिए शिक्षा विभाग ने आज एक व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया। जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) योगेश शर्मा, बीआरसीसी केशव दुबे, और संकुल प्राचार्य श्रीकिशन रायखेरे के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय दल ने न केवल छात्रों की शैक्षिक गुणवत्ता परखी, बल्कि उन जर्जर स्कूल भवनों का भी दौरा किया जो बच्चों के लिए खतरा बन चुके हैं। इस चुनौतीपूर्ण दौरे में टीम को मंडला बॉर्डर पर स्थित एक स्कूल तक पहुंचने के लिए नाव का भी सहारा लेना पड़ा, जो दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा के बुनियादी ढांचे की दयनीय स्थिति को उजागर करता है।


 

शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार पर जोर

 

निरीक्षण दल ने सबसे पहले शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरगी और उसके अधीनस्थ स्कूलों में छात्रों के शैक्षिक स्तर का आकलन किया। टीम ने बच्चों से विभिन्न विषयों पर सवाल किए और उनके सीखने की प्रक्रिया को समझा। इस दौरान, शिक्षकों को छात्रों की शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए विशेष दिशा-निर्देश दिए गए। डीपीसी योगेश शर्मा ने कहा, “हमारा मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हमारे बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करें और उनका भविष्य उज्ज्वल हो। जहां भी सुधार की गुंजाइश होगी, हम तुरंत कदम उठाएंगे।” यह पहल छात्रों के भविष्य को मजबूत करने और जिले में शिक्षा के समग्र स्तर को ऊपर उठाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।


 

जर्जर भवनों का जोखिम भरा मुआयना: नाव बनी सहारा

 

इस अभियान का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा था परिक्षेत्र में स्थित क्षतिग्रस्त और जर्जर प्राथमिक शालाओं का दौरा। दल ने प्राथमिक शाला इंद्रानगर, एकीकृत माध्यमिक शाला घाना, और प्राथमिक शाला बढ़ैयाखेड़ा का दौरा किया, जहां भवनों की स्थिति चिंताजनक पाई गई।

हालांकि, सबसे गंभीर स्थिति एकीकृत माध्यमिक शाला कठौतिया की थी। यह स्कूल मंडला बॉर्डर पर स्थित है और वहां तक पहुंचने का एकमात्र जरिया नाव है। टीम ने नाव से इस दुर्गम स्कूल तक पहुंचकर जर्जर भवन का निरीक्षण किया, जो बच्चों के लिए किसी भी समय खतरा बन सकता है। कठौतिया के ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने लंबे समय से इस शाला भवन की मरम्मत की मांग की थी, जिसे अब जाकर संज्ञान में लिया गया है।


 

जर्जर भवनों के पुनर्निर्माण का प्रस्ताव तैयार

 

स्कूल भवनों की दयनीय स्थिति को देखते हुए, निरीक्षण टीम ने उनके पुनर्निर्माण या व्यापक मरम्मत के लिए तत्काल प्रस्तावना तैयार की है। संकुल प्राचार्य श्रीकिशन रायखेरे ने बताया कि “कई वर्षों से इन स्कूलों के भवन बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रही हैं। इस दौरे का मकसद जमीनी हकीकत को समझना और इन भवनों को सुरक्षित व उपयोग योग्य बनाने के लिए जल्द से जल्द कार्रवाई शुरू करना है।” यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि छात्रों को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण में शिक्षा मिल सके।


 

पर्यावरण संरक्षण का भी दिया संदेश

 

इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। डीपीसी योगेश शर्मा, बीआरसीसी केशव दुबे, प्राचार्य श्रीकिशन रायखेरे के अलावा, बीएसी रत्नेश मिश्रा, सीएसी संतोष मिश्रा, उपयंत्री रमाकांत त्रिपाठी और राजेश सोनकर, जनपद सदस्य दयावती किशोर यादव, क्षेत्रीय सरपंच और अन्य जनप्रतिनिधि शामिल थे। टीम ने इस अवसर पर ग्राम में वृक्षारोपण भी किया, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह दर्शाता है कि शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

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