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आखिर क्या है शिवराज की पदयात्रा के मायने!!!! एमपी की राजनीति में अपनी पकड़ बनाए रखना या फिर बेटे की पालिटिकल लांचिंग

भोपाल यश भारत।केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान अच्छी तरह से जानते हैं कि कैसे लोगों से जुड़े रहना है। मध्य प्रदेश की सियासत में उनकी पहचान पांव-पांव वाले भैया के रूप में थी। शिवराज सिंह चौहान खड़ा हो जाते हैं तो वहां भीड़ जमा हो जाती है। केंद्र की राजनीति में शिफ्ट होने के बाद उनकी सक्रियता मध्य प्रदेश में कम हो गई है। अपनी मौजूदगी को बनाए रखने के लिए वह अपने संसदीय क्षेत्र में विकसित भारत संकल्प यात्रा कर रहे हैं। लेकिन इस यात्रा के जरिए शिवराज सिंह चौहान कुछ और साधना चाहते हैं।

परिवार में पदयात्रा 

शिवराज सिंह चौहान के साथ पदयात्रा में क्षेत्र के बीजेपी नेताओं के साथ-साथ उनका परिवार भी चल रहा है। साथ ही पत्नी साधना सिंह चौहान चल रही हैं। वहीं, बड़े बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान और बहू अमानत बंसल भी चल रही। दोनों सास-ससुर के साथ कदमताल करते चल रहे हैं। वहीं, छोटे बेटे कुणाल और उनकी पत्नी साथ में नहीं दिख रही हैं। हालांकि दोनों का सियासत से कोई लेना देना नहीं

खुद को एमपी में बनाए रखना चाहते हैं शिवराज

एमपी से दिल्ली शिफ्ट होने के बाद शिवराज सिंह चौहान के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह अपने वजूद को कायम रखें। दिल्ली गए प्रदेश के नेताओं का हाल वह देख चुके हैं। इसी वजह से तमाम तरह की व्यस्तताओं के बावजूद वह सप्ताह में एक-दो दिन एमपी आना नहीं भूलते हैं। सीहोर और विदिशा शिवराज सिंह चौहान का गढ़ रहा है। विधानसभा चुनाव वह सीहोर से जीतते रहे हैं और लोकसभा विदिशा से। अपने क्षेत्र में पदयात्रा निकालकर अपनी पकड़ को मजबूत बनाए रखना चाहते हैं। साथ ही जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं से इसके जरिए संवाद भी स्थापित कर रहे हैं।

बेटे जमा रहे हैं पैर

वहीं, बुधनी विधानसाभ शिवराज सिंह चौहान की पारंपरिक सीट रही है। इस बार उनके बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान को उम्मीद थी कि पिता की विरासत को संभालने का मौका पार्टी मुझे ही देगी। उम्मीदवारों के पैनल में कार्तिकेय का नाम भी था लेकिन दिल्ली से मुहर नहीं लगी। इसे लेकर कार्तिकेय सिंह चौहान का दर्द भी छलका था।इसके बावजूद उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी है। पिता के जाने के बाद भी बुधनी क्षेत्र में कार्तिकेय सिंह चौहान लगातार एक्टिव रहते हैं। अब उनके साथ स्थानीय कार्यक्रमों में पत्नी अमानत बंसल भी दिखती हैं। अब शिवराज सिंह चौहान की पदयात्रा में भी कार्तिकेय और अमानत दोनों दिख रहे हैं।

क्या है मायने 

सियासी समझ रखने वाले लोग मानते हैं कि इससे साफ है कि शिवराज सिंह चौहान पदयात्रा के जरिए एमपी की राजनीति में अपनी पकड़ बनाए रखना चाहते हैं। दूसरी समस्या यह है कि उनके बाद फैमिली से किसी की पॉलिटिक्ल लॉन्चिंग नहीं हुई है। बेटे कार्तिकेय लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। मगर उम्मीद कायम है। ऐसे में शिवराज सिंह की पुरजोर कोशिश होगी कि अगले चुनाव में बेटे की दावेदारी मजबूत हो

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